बिहार में नीतीश कुमार ने आज ऐतिहासिक गांधी मैदान पर 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। नीतीश के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा सहित एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री मौजूद रहे। लेकिन इन सबके बीच आम लोगों में एक सवाल उठा है कि अब सीएम नीतीश की सैलरी और पेंशन क्या होगी? ये सवाल इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि नीतीश कुमार ने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। आण लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि इतने लंबे राजनीतिक करियर के बाद नीतीश के रिटायरमेंट पर उनकी पेंशन कितनी होगी। इस रिपोर्ट में हम इसी सवाल का विस्तृत जवाब आपके लिए लेकर आए हैं।
पेंशन के लिए CM पद नहीं, कुल सेवाकाल होता है मायने
सबसे बड़ी बात यह है कि देश में मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री जैसे पदों के लिए अलग से कोई पेंशन नहीं होती। पेंशन केवल विधायक-सांसद के रूप में बिताए गए कुल वर्षों के आधार पर तय होती है। बिहार विधानमंडल के नियमों के अनुसार कोई कितनी बार भी सीएम बने, इससे उसकी पेंशन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। बिहार में विधायक की पेंशन 45,000 रुपए प्रति माह है। इसके बाद हर अतिरिक्त वर्ष पर 4,000 रुपए की बढ़ोत्तरी मिलती है। यानी पेंशन की असल गणना सेवाकाल पर आधारित होती है, न कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से। इसलिए नीतीश कुमार का 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना उनकी पेंशन को नहीं बढ़ाता है लेकिन उनका करीब 40 वर्षों का विधायी कार्यकाल जरूर बड़ा फर्क पैदा करता है।
नीतीश कुमार को सांसद और विधायक दोनों से पेंशन
नीतीश कुमार 1989 से 2004 तक लंबे समय तक सांसद रहे। सांसद के रूप में न्यूनतम पेंशन 31,000 रुपए है और हर वर्ष के साथ 2,500 रुपए प्रति माह की वृद्धि होती है। इस आधार पर उनकी सांसद पेंशन लगभग 68,500 रुपए के पार पहुंचती है, जिसमें डीए अलग से जुड़ता है। दूसरी तरफ, विधायक/एमएलसी के रूप में वे साल 1985 से अब तक लगभग 40 वर्ष सक्रिय रहे हैं। पहले वर्ष पर 45,000 रुपए की न्यूनतम पेंशन और 39 अतिरिक्त वर्षों पर 4,000 रुपए प्रति वर्ष के हिसाब से उनकी पेंशन 2,01,000 प्रतिमाह बनती है। इस तरह सांसद और विधायक पेंशन मिलाकर नीतीश कुमार की कुल अनुमानित पेंशन लगभग 2,69,000 रुपए से ऊपर बैठती है, जो उनकी मुख्यमंत्री सैलरी 2.50 लाख से ज्यादा है।
10वीं बार सीएम पद की शपथ से पेंशन का संबंध नहीं
कई लोग मानते हैं कि 10 बार मुख्यमंत्री बनने पर पेंशन 10 गुना हो जाएगी, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। पेंशन का मुख्यमंत्री पद से कोई सीधा संबंध नहीं है। इसके बजाय गणना सांसद के रूप में बिताए गए वर्ष और विधायक-एमएलसी के तौर पर कुल सेवाकाल के आधारों पर होती है। बिहार विधानमंडल के नियमों के अनुसार, पेंशन अधिकतम सेवाकाल पर आधारित होती है, जिससे नीतीश कुमार की अनुमानित पेंशन करीब 2.69 लाख से अधिक बनेगी, जो की मुख्यमंत्री के वेतन से अधिक है।
अलग-अलग राज्यों में विधायकों की सैलरी-पेंशन में बहुत अंतर
देश के अलग-अलग राज्यों में विधायकों के वेतन में बहुत अंतर है। विधायकों की सबसे अधिक सैलरी तेलंगाना में है। तेलंगाना में विधायक की सैलरी 2.50 लाख रुपए प्रति माह है। दूसरे नंबर पर दिल्ली में एमएलए का वेतन 2.25 लाख रुपए है। तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र में 2 लाख रुपए, चौथे नंबर पर उत्तर प्रदेश में 1.87 लाख रुपए, पांचवे नंबर पर कर्नाटक और बिहार में 1.60 लाख रुपए और छठे नंबर पर हरियाणा में 1.50 लाख रुपए विधायक की सैलरी है। देश में सबसे कम केरल के विधायकों की सैलरी है, केरल के विधायकों की सैलरी महज 70 हजार रुपए प्रति माह है। वेतन के आधार पर अलग-अलग राज्यों में पेंशन तय होती है।