
बिहार में 27 अक्टूबर को छठ का पर्व मनाया जा रहा था, इसी दौरान आरजेडी ने अपने 27 बागियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। जिन लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है उनमें कई मौजूदा विधायक भी शामिल हैं, जो पार्टी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे।
एक तरफ तेजस्वी यादव बिहार में मुख्यमंत्री बनने के लिए चुनाव प्रचार में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं दूसरी तरफ पार्टी के बागी उनकी राह में रोड़ा अटका रहे थे, लिहाजा उनके खिलाफ कार्रवाई होनी ही थी। आरजेडी ने ऐसे 27 पार्टी नेताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। ये कार्रवाई छठ के दिन की गई। इन नेताओं पर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव प्रचार में शामिल होने का आरोप है। निष्कासित नेताओं में कई पूर्व विधायक और पार्टी पदाधिकारी शामिल हैं। आरजेडी ने ये कदम पार्टी में अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया है।
आरजेडी ने जिन नेताओं को पार्टी से बेदखल किया है उनमें परसा से मौजूदा विधायक छोटे लाल राय को पार्टी से निकाल दिया है। इनके अलावा, परिहार से रितू जायसवाल, कटिहार से पूर्व विधायक राम प्रकाश महतो, मुजफ्फरपुर से पूर्व विधायक अनिल सहनी, बड़हरा से पूर्व विधायक सरोज यादव, मुजफ्फरपुर से पूर्व विधान पार्षद गणेश भारती को पार्टी से निकाल बाहर किया है। ये आरजेडी के वो बागी हैं जो आरजेडी में रहते हुए निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे या इनके खिलाफ पार्टी के विरोध में प्रचार करने का आरोप लगा था।
आरजेडी ने पार्टी के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष कुमार गौरव, दरभंगा जिला महासचिव राजीव कुशवाहा, जाल से महेश प्रसाद गुप्ता, जाले से वकील प्रसाद यादव, मोतिहारी से पुनम देवी गुप्ता, मोतिहारी से किसान प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष सुबोध यादव, सारण जिले के सेनपुर से प्रदेश महासचिव सुरेन्द्र प्रसाद यादव को भी पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वहीं जगदीशपुर से नीरज राय, वैशाली से प्रदेश महासचिव अनिल चन्द्र कुशवाहा, भागलपुर से जिला प्रवक्ता अजीत यादव, भागलपुर से मोती यादव, पूर्वी चंपारण से चिरैया प्रखंड अध्यक्ष रामनरेश पासवान और पताही प्रखंड अध्यक्ष अशोक चौहान पर भी गाज गिरी है।
आरजेडी ने 27 बागियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है, लेकिन उसकी मुश्किलें अभी भी कम नहीं हुई हैं। महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा तेजस्वी यादव और डिप्टी सीएम के उम्मीदवार मुकेश सहनी के सामने अभी और कई चुनौतियां हैं। क्योंकि महागठबंधन की तकरीबन सभी पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में प्रत्याशी बनाया है। इस फ्रेंडली फाइट की वजह से अभी भी गठबंधन में असमंजस की स्थिति देखने को मिल रही है।
महागठबंधन की तरफ से भले ही चुनाव प्रचार में जीत के लिए जोर लगाया जा रहा है, लेकिन अभी भी कांग्रेस की तरफ से स्थिति साफ नजर नहीं आ रही है। महागठबंधन साझा घोषणापत्र जारी करने जा रहा है। लेकिन बताया जा रहा है कि इस साझा घोषणापत्र के दौरान राहुल गांधी मौजूद नहीं रहेंगे। वैसे तो राहुल गांधी के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार की घोषणा हो चुकी है। दो जगहों पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के साझा चुनाव प्रचार की बात भी कही जा रही है लेकिन राहुल गांधी कितने दिन बिहार में प्रचार करेंगे अभी ये साफ नहीं है।
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