Bihar Assembly Election: राजनीति से भी लोग रिटायर होते हैं, कई नेताओं के पूरे परिवार ने बनाई चुनाव से दूरी

राजनीति में ऐसा कहा जाता है कि नेता कभी रिटायर नहीं होते, रिटायर हो भी जाते हैं तो अपने परिवार के किसी सदस्य को अपनी राजनीतिक विरासत सौंप देते हैं। लेकिन बिहार में कई नेता राजनीति से रिटायर हो चुके हैं, ना सिर्फ रिटायर हुए हैं बल्कि उनका पूरा परिवार इस बार की चुनावी गहमा गहमी से दूरी बनाए हुए है।

Rajkumar Singh
पब्लिश्ड23 Oct 2025, 05:41 PM IST
रमई राम और शरद यादव
रमई राम और शरद यादव(HT)

बिहार विधानसभा चुनाव का शोर अपने चरम पर पहुंच चुका है। लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में कई ऐसे पुराने राजनीतिक घराने हैं जिन्होंने पूरी तरह से अपने आप को चुनाव से दूर रखा है। कुछ नेताओं या उनके परिवार के लोगों को टिकट नहीं मिला है तो वहीं कुछ ऐसे भी नेता हैं जिन्होंने खुद अपने आप को राजनीति से दूर कर लिया है। रमई राम से लेकर शरद यादव और उमाशंकर सिंह से लेकर प्रह्लाद यादव तक का परिवार इसमें शामिल है।

राजनीति से दूर हुआ उमाशंकर सिंह का परिवार

सीवान जिले के महाराजगंज के रहने वाले पूर्व सांसद स्वर्गीय उमाशंकर सिंह का परिवार भी इस बार बिहार की चुनावी राजनीति से पूरी तरह से गायब है। उमाशंकर के बेटे जितेंद्र स्वामी भी राजनीति से दूर हो गए हैं। उन्होंने इस साल हो रहे विधानसभा चुनाव में सूबे में सक्रिया तमाम राजनीतिक दलों पर टिकट बेचने का आरोप लगाया था। इस बार उमाशंकर सिंह के परिवार के किसी भी सदस्य ने इस बार नामांकन नहीं किया था।

यह भी पढ़ें | महागठबंधन में खुल गई मतभेद की गांठ, तेजस्वी होंगे CM का चेहरा, सहनी को भी भरोसा

रमई राम के पूरे परिवार का राजनीति से संन्यास

नौ बार विधायक रहे रमई राम अब राजनीति से संन्यास ले चुके हैं, ना सिर्फ रमई राम बल्कि उनका पूरा कुनबा राजनीति छोड़ चुका है। रमई राम बोचहां से नौ बार विधायक रह चुके रमई राम लालू, रबड़ी और नीतीश तीनों सरकारों में मंत्री रह चुक हैं। उन्होंने अपने बेटी गीता कुमारी को एमएलसी बनवाया, जो बाद में बीजेपी से जुड़ीं। लेकिन इस बार बोचहां सीट चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) के खाते में चली गई है और पूरा परिवार राजनीति से बाहर हो गया है। ये पहला मौका है जब 1967 के बाद रमई राम का परिवार बोचहां की राजनीति से पूरी तरह बाहर हो गया है।

प्रह्लाद यादव भी राजनीति से दूर हुए

बिहार के लखीसराय जिले की राजनीति का एक छोर समझे जाने वाले विधायक प्रह्लाद यादव 30 साल बाद चुनाव मैदान से बाहर हुए हैं। प्रह्लाद यादव सूर्यगढ़ा विधानसभा सीट से अभी भी विधायक हैं। साल 2024 में बिहार विधानसभा में विश्वासमत के दौरान पहली बार पाला बदलकर आरजेडी से बीजेपी में शामिल हुए थे। प्रह्लाद यादव 1995 में पहली बार निर्दलीय चुनाव जीते थे। चुनाव जीतने के बाद वो तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव के खेमे में शामिल हो गए थे। प्रह्लाद यादव को इस साल 2025 में हो रहे विधानसभा चुनाव में ना तो एनडीए की तरफ से और ना ही महागठबंधन की तरफ से किसी पार्टी ने टिकट दिया।

यह भी पढ़ें | बिहार के चुनाव में अजब गजब लड़ाई, कहीं पति-पत्नी तो कहीं पिता-पुत्र आमने सामने

राजनीति से दूर शरद यादव का परिवार

कभी बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरों में से एक रहे स्वर्गीय शरद यादव का परिवार भी इस बार राजनीति से पूरी तरह गायब है। शरद यादव की सुभाषिनी और बेटा शांतनु बुंदेला दोनों इस बार राजनीति की पिच से दूर हैं।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़ElectionBihar Assembly Election: राजनीति से भी लोग रिटायर होते हैं, कई नेताओं के पूरे परिवार ने बनाई चुनाव से दूरी
More
बिजनेस न्यूज़ElectionBihar Assembly Election: राजनीति से भी लोग रिटायर होते हैं, कई नेताओं के पूरे परिवार ने बनाई चुनाव से दूरी