कैमूर जिले में चार विधानसभा सीटें हैं, भभुआ, मोहनिया, चैनपुर और रामगढ़, इन चार विधानसभा सीटों में से तीन सीटों पर आरजेडी का कब्जा है। इस जिले की एक और दिलचस्प बात ये है कि यहां की चार में से तीन सीटों पर प्रत्याशी इस बार दल बदल कर अपनी पुरानी पार्टी के खिलाफ मैदान में उतरे हैं। कैमूर जिले में यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री बहन मायावती की पार्टी बीएसपी की भी अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है। पिछली बार के विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने भी एक सीट पर जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार मायावती के लिए भी यहां समीकरण पूरी तरह बदले हुए नजर आ रहे हैं।
भभुआ विधानसभा सीट
कैमूर जिले में सबसे पहले बाद करते हैं भभुआ विधानसभा सीट की। भभुआ विधानसभा सीट पर इस बार बड़ा ही रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है। जहां पिछली बार आरजेडी की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले भरत बिंद इस बार बीजेपी की तरफ से मैदान में ताल ठोक रहे हैं। उनका मुकाबाल उनकी पुरानी पार्टी आरजेडी उम्मीदवार वीरेंद्र सिंह से है। भरत बिंद ने साल 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की रिंकी रानी पांडेय को करारी शिकस्त दी थी।
मोहनिया विधानसभा सीट
मोहनिया में भी बहुत ही रोचक चुनावी मुकाबाल देखने को मिल रहा है। पिछली बार आरजेडी की टिकट पर बीजेपी प्रत्याशी को मात देने वाली संगीता देवी इस बार बीजेपी की तरफ से मैदान में डटी हैं। संगीता देवी ने साल 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के निरंजन राम को 12 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। इस बार आरजेडी ने इस सीट पर श्वेता सुमन को मैदान में उतारा था, लेकिन यूपी की निवासी श्वेता सुमन के दस्तावेजों में गड़बड़ी की वजह से चुनाव आयोग ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था। जिसके बाद आरजेडी ने निर्दलीय प्रत्याशी और पूर्व सांसद छेदी पासवान के बेटे रवि शंकर पासवान को समर्थन दिया है।
चैनपुर विधानसभा सीट
कैमूर जिले की चैनपुर विधानसभा सीट पर भी लड़ाई कुछ कम दिलचस्प नहीं है। यहां से मौजूदा विधायक जमा खान जेडीयू की टिकट पर चैनपुर विधानसभा सीट से ताल ठोक रहे हैं। इन्होंने साल 2020 के विधानसभा चुनाव में बहन मायावती की पार्टी बीएसपी की टिकट पर चुनाव जीता था और चुनाव जीतते ही वो जेडीयू में शामिल हो गए। जिसके तुरंत बाद नीतीश कुमार ने इन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया था। इस बार जमा खान जेडीयू की टिकट पर मैदान में हैं तो साल 2020 में बीजेपी की टिकट पर जमा खान के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले ब्रज किशोर सिंह इस बार आरजेडी की टिकट पर जमा खान के खिलाफ मैदान में हैं।
रामगढ़ विधानसभा सीट
कैमूर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट पर इस बार चुनावी लड़ाई शतरंज के मोहरों की तरह है जिसे समझना बहुत मुश्किल है। इस बार बीजेपी की टिकट पर अशोक सिंह चुनावी मैदान में हैं जिन्होंने साल 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। इस बार बीजेपी के अशोक सिंह का मुकाबला बीएसपी के सतीश सिंह और आरजेडी के अजीत सिंह से है। दरअसल 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के सुधाकर सिंह ने जीत दर्ज की थी। जिसके बाद साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बक्सर लोकसभा सीट से उन्हें मैदान में उतारा था और वो चुनाव जीतकर सांसद बने। जिसके बाद रामगढ़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी के अशोक सिंह ने करीबी मुकाबले में बीएसपी के सतीश सिंह को हराया था।
इस तरह से देखें को कैमूर जिले की चारों की चारों विधनसभा सीट पर खिचड़ी मुकाबला हो रहा है। कई प्रत्याशी अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर नई पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं वहीं कई उम्मीदवार पहली बार जीत के लिए जोर लगा रहे हैं। जिले के ज्यादातर उम्मीदवार अपना हृदय परिवर्तन कर चुनावी मैदान में हैं। कैमूर जिले की एक और खासियत ये है कि यहां उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहन मायावती की पार्टी बीएसपी का अच्छा खासा प्रभाव देखने को मिलात है। अब इस बार देखना होगा कि मतदाता किस पार्टी के इस उम्मीदवार पर मेहरबान होते हैं।