11 नवंबर को 20 जिलों में असली चुनौती, दूसरे चरण के 7 जिलों में NDA और 2 जिलों में महागठबंधन का नहीं खुला था खाता

बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने आधी चुनावी वैतरणी पार कर ली है। पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर चुनाव हो चुके हैं, दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होना है। NDA की असली चुनौती दूसरे चरण के मतदान में है, जहां 20 में से 7 जिलों में एनडीए का सुपड़ा साफ हो गया था।

Rajkumar Singh
अपडेटेड8 Nov 2025, 06:48 PM IST
बिहार में एनडीए गठबंधन के नेता
बिहार में एनडीए गठबंधन के नेता(PTI)

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 11 नवंबर को होने वाले मतदान में 20 जिलों में से सात जिलों में वर्ष 2020 के चुनाव में एनडीए और दो जिलों में महागठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया था। दूसरे और अंतिम चरण में 11 नवंबर को होने वाले मतदान में 20 जिलों में से सात जिलों शिवहर, किशनगंज, कैमूर, रोहतास, अरवल, जहानाबाद और औरंगाबाद, जिले में एनडीए और दो जिलों सुपौल और जमुई में महागठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया था।

किशनगंज में एनडीए की हुई बुरी हार

साल 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए में बीजेपी, जेडीयू, जीतन राम मांझी की हम और मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी शामिल थी। महागबंधन में एनडीए, कांग्रेस, भारत की CPI(ML), CPI(M) और CPI शामिल थी। शिवहर जिले की एकमात्र शिवहर विधानसभा सीट पर एनडीए को मात मिली थी। वहीं किशनगंज जिले की सभी चार सीट बहादुरगंज, ठाकुरगंज, किशनगंज और कोचाधामन में एनडीए प्रत्याशियों को हार मिली थी। कैमूर जिले की सभी चार सीटें रामगढ़ृ, मोहनियां, भभुआ और चैनपुर में एनडीए का कोई भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया था।

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7 जिलों में साफ हो गया था NDA का सूपड़ा

रोहतास जिले की सभी सात सीटें चेनारी, सासाराम, करहगर, दिनारा, नोखा, डेहरी और काराकाट में राजग उम्मीदवारों को शिकस्त मिली। वहीं अरवल जिले की सभी दो सीट अरवल और कुर्था में राजग प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह जहानाबाद की सभी तीन सीटों जहानाबाद ,घोसी और मखदुमपुर में भी एनडीए के प्रत्याशियों को हार मिली थी। वहीं औरंगाबाद की सभी छह सीट गोह, ओबरा, नवीनगर, कुटुंबा, औरंगाबाद और रफीगंज में एनडीए उम्मीदवारों को शिकस्त मिली थी। कुल मिलाकर इन सात जिलों की 27 सीटों पर एनडीए को पराजय का सामना करना पड़ा।

14 पर JDU तो 10 सीटों पर BJP की हार

इन सीटों में से जेडीयू को 14 सीटों शिवहर, ठाकुरगंज, कोचाधामन, चेनारी, सासाराम, करहगर, दिनारा, नोखा, कुर्था, जहानाबाद, घोसी, ओबरा, नवीनगर और रफीगंज पर हार मिली। वहीं बीजेपी को 10 सीटों किशनगंज, रामगढ़, मोहनियां, भभुआ , चैनपुर, डेहरी, काराकाट, अरवल, गोह और औरंगाबाद में हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह वीआईपी को बहादुरगंज जबकि हम को मखदुमपुर और कुटुबा में पराजय मिली। उपेंद्र कुशवाहा की वीआईपी उस वक्त एनडीए का हिस्सा थी जबकि इस बार महागठबंधन की तरफ से चुनाव लड़ रही है।

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सुपौल, जमुई में महागठबंधन का नहीं खुला खाता

इसी तरह सुपौल जिले की सभी 5 सीट निर्मली, पिपरा, सुपौल, त्रिवेणीगंज और छातापुर में महागठबंधन प्रत्याशियों का खाता नहीं खुला था। वहीं जमुई जिले की सभी 4 सीटें सिकंदरा, जमुई, झाझा और चकाई सीट पर महागठबंधन प्रत्याशियों को हार मिली थी। इस तरह दो जिलों की 9 सीटों पर महागठबंधन को शिकस्त का सामना करना पड़ा था। इन सीटों में आरजेडी को 7 सीटों निर्मली, पिपरा, त्रिवेणीगंज ,छातापुर, जमुई, झाझा और चकाई में जबकि कांग्रेस को सुपौल और सिकंदरा में हार का सामना करना पड़ा।

ओवैसी ने चौंकाया, मायावती का खुला खाता

किशनगंज में एनडीए-महागठबंधन की लड़ाई में ओवैसी की पार्टी AIMIM बाजी मार ले गई थी। किशनगंज की दो विधानसभा सीटें बहादुरगंज और कोचाधामन में AIMIM को जीत मिली थी। इसी तरह कैमूर जिले की चैनपुर सीट पर बहन मायावती की पार्टी बीएसपी को जीत मिली थी। यहां बीएसपी प्रत्याशी मोहम्मद जमा खान को जीत मिली।, हालांकि बाद में वह जदयू में शामिल हो गए और नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री बने। इस चुनाव में AIMIM और बीएसपी, ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट में शामिल था। इस गठबंधन में उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी RLM, समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक, सुहेलदेव की भारतीय समाज पार्टी और जनवादी पार्टी सोशलिस्ट भी शामिल थी। जमुई जिले की चकाई सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी सुमित सिंह ने बाजी अपने नाम की थी। सुमित सिंह वर्तमान में नीतीश कुमार की सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हैं।

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