14 नवंबर पर बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे, सर्वे एनडीए की सरकार के पक्ष में नंबर दिखा रहे हैं। लेकिन महागठबंधन भी हार मानने को तैयार नहीं है। महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी यादव भी कह रहे है कि शपथ तो इस बार वही लेंगे। इसी बीच एक्सिस माय इंडिया के सर्वे ने आरजेडी और महागठबंधन की उम्मीद के दिए में तेल से भींगी हुई बाती डाल दी है। लेकिन एनडीए को इस बार भी महिला वोटर को अपने लिए ट्रंप कार्ड मान रहा है। आखिर क्यों खास तौर पर जेडीयू को महिला मतदाताओं पर इतना भरोसा है आइए जानने की कोशिश करते हैं।
बिहार में 21वीं सदी में महिला मतदाताओं की महिमा का जितना बखान किया जाए कम है, हम ऐसा इस लिए कह रहे हैं क्योंकि आंकड़े ही कुछ ऐसी गवाही दे रहे हैं कि आप भी महिला मतदाताओं की अहमियत से प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे। बात सिर्फ 25 साल पहले 20वीं सदी की है। यानी साल 2000 से पहले बिहार में 70 प्रतिशत पुरुष मतदाता मतदान करते थे, जबकि महिलाओं के मतदान करने का प्रतिशत 53 प्रतिशत के आसपास था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक इस बार साल 2025 के विधानसभा चुनाव मे 71.6 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान किया है, जबकि पुरुषों के मतदान का प्रतिशत 62.8 प्रतिशत रहा है। इस तरह से देखें तो पुरुषों के मुकाबले 9 प्रतिशत ज्यादा महिलाओं ने इस बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है। इस बार के चुनाव में 2.46 करोड़ पुरुष मतदाताओं ने वोट डाला, जबकि 2.51 करोड़ महिलाओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, इस तरह से पुरुषों के मुकाबले 5 लाख ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया है। एक्सिस माय इंडिया के सर्वे पर भरोसा करें तो साल 2025 के विधानसभा चुनाव में 66 प्रतिशत महिलाओं ने एनडीए को वोट किया है जबकि महागठबंधन के खाते में सिर्फ 27 प्रतिशत महिलाओं के वोट गए हैं। इस तरह से देखा जाए तो महिला मतदाताओं का एनडीए के प्रति झुकाव अभी भी नजर आ रहा है।
एक्सिस माय इंडिया के सर्वे पर भरोसा करें तो एनडीए सरकार का जीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को 10 हजार रुपये देने का फैसला, तेजस्वी यादव के 30 हजार रुपये वेतन देने के वादे पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि महिला मतदाताओं का अभी भी नीतीश कुमार के प्रति रुझान बरकरार रहने का अंदेशा जताया जा रहा है। हालांकि ये सब कयास और संभावनाएं हैं कहीकत की जमीन पर आंकड़े 14 नवंबर को वोटों की गिनती के बाद आएंगे। उसके बाद साफ हो जाएगा कि बिहार के मतदाताओं ने जिसमें 9 प्रतिशत ज्यादा महिलाओं ने वोट दिया है किसके वादे पर मुहर लगाई है।
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