रोहतास की सभी 7 सीटों पर महागठबंधन का कब्जा, लेकिन इस बार बागी बढ़ाएंगे मुश्किल, क्या एनडीए के लिए आपदा में अवसर?

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में रोहतास जिले का किला बचाना इस बार महागठबंधन के लिए बड़ी चुनौती है। पिछली बार पूरे जिले की 7 सीटों पर क्लीन स्वीप करने वाले महागठबंधन को इस बार बागियों की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। जिसे एनडीए आपदा में अवसर की तरह देख रहा है।

Rajkumar Singh
पब्लिश्ड8 Nov 2025, 07:46 PM IST
तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव(PTI)

बिहार में दूसरे चरण के लिये 11 नवंबर को हो रहे विधानसभा चुनाव में रोहतास जिले में सभी सात सीटों पर महागठबंधन का कब्जा है और इन सीटों में से आरजेडी ने अपने तीन विधायकों को बेटिकट कर दिया है। रोहतास जिले की सभी सात सीटों सासाराम, डेहरी, दिनारा, चेनारी, नोखा, करगहर और काराकाट पर महागठबंधन का कब्जा है। सासाराम, डेहरी, दिनारा और नोखा में आरजेडी, चेनारी और करहगर में कांग्रेस और काराकाट में CPI(ML) का कब्जा है। आरजेडी ने सासाराम, डेहरी और दिनारा से अपने विधायकों को बेटिकट कर दिया है।

सासाराम में आरजेडी को स्नेहलता की चुनौती

शेरशाह सूरी के मकबरा के लिए प्रसिद्ध सासाराम सीट से आरजेडी ने विधायक राजेश गुप्ता का टिकट काट दिया है। आरजेडी ने यहां सतेन्द्र साह को उम्मीदवार बनाया है। सत्येंद्र साह को चुनौती देने के लिए RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा चुनावी समर में उतरी हैं। स्नेहलता कुशवाहा पहली बार चुनावी रणभूमि में उतरी हैं। साल 2020 के चुनाव में आरजेडी के उम्मीदवार राजेश गुप्ता ने जेडीयू प्रत्याशी अशोक कुमार को पराजित कर दिया था।

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शेरशाह सूरी और हरिश्चंद्र की जन्मस्थली

रोहतास जिले में शेरशाह सूरी का मकबरा है, जिन्होंने दिल्ली के मुगल शासक हुमायूं को सत्ता से बेदखल कर दिया था। अफगानी शासक शेरशाह सूरी का मकबरा आज भी यहां उनकी स्मृतियों को संजोए हुए है। भारत-अफगान शैली में लाल बलुआ पत्थर से बना मकबरा झील के बीच में है। शेरशाह द्वारा बनवाया गया देश का प्रसिद्ध ग्रांड ट्रंक रोड इसी शहर से होकर गुज़रता है। यहीं पर एक पहाड़ी पर गुफा में अशोक का लघु शिलालेख संख्या एक को उकेरा गया है। इसी क्षेत्र में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र का निवास स्थान है। वहीं रोहतास जिले का उल्लेख हमारी पौराणिक गाथाओं में भी है। मान्यता है कि राजा सत्य हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व के नाम पर ही जिले का नाम रोहतास पड़ा था। देवी चंडी का एक भव्य मंदिर भी यहां है। सासाराम को गेट वे ऑफ 'बिहार' भी कहा जाता है। सासाराम सीट पर 22 उम्मीदवार चुनावी दंगल में डटे हुए हैं।

डेहरी में आरजेडी को चिराग की चुनौती

डेहरी विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी ने विधायक फतेह बहादुर सिंह को बेटिकट कर नए खिलाड़ी गुड्डु चंद्रवंशी पर दांव लगाया है, वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर नए सूरमा सोनु सिंह चुनावी मैदान में उतरे हैं। साल 2020 में आरजेडी के फतेह बहादुर सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार सत्य नारायण सिंह को चुनावी दंगल में मात दे दी थी। इस सीट पर दस उम्मीदवार चुनावी संग्राम में जोर आजमा रहे हैं।

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आरजेडी-एनडीए को निर्दलीय की चुनौती

दिनारा सीट से आरजेडी ने विधायक विजय कुमार मंडल को बेटिकट कर दिया है। आरजेडी ने यहां राजेश यादव चुनावी दंगल में उतारा है। RLM के टिकट पर मंत्री संतोष सिंह के भाई आलोक कुमार सिंह पहली बार चुनावी अखाड़े में किस्मत आजमा रहे हैं। पूर्व मंत्री जय कुमार सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी अखाड़ में उतर कर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगे हुए हैं। साल 2020 में आरजेडी के विजय कुमार मंडल ने लोक एलजेपी उम्मीदवार राजेन्द्र प्रताप सिंह को पराजित कर दिया था। जेडीयू उम्मीदवार और तत्कालीन मंत्री और विधायक जय कुमार सिंह तीसरे नंबर पर थे। इस सीट पर 12 उम्मीदवार चुनावी रण में उतरे हैं।

चेनारी में कांग्रेस के बागी की चुनौती

रोहतास जिले की चेनारी सीट से मौजूदा विधायक मुरारी गौतम अब कांग्रेस का हाथ छोड़कर चिराग पासवान की पार्टी के खेमे में चले गए हैं। मुरारनी गौतम LJP(R) के टिकट पर चुनावी रण में उतर चुके हैं, वहीं कांग्रेस ने यहां चेनारी के प्रखंड प्रमुख मंगल राम को चुनावी दंगल में उतार दिया है। साल 2020 में कांग्रेस उम्मीदवार मुरारी गौतम ने जदयू उम्मीदवार ललन पासवान को पराजित कर दिया था। इस सीट पर 15 उम्मीदवार चुनावी रण में उतरे हैं।

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नोखा में आरजेडी-जेडीयू की भिड़ंत

धान के कटोरा कहे जाने वाले नोखा विधानसभा सीट पर राजद के टिकट पर बिहार सरकार के पूर्व मंत्री रहे स्व.जंगी चौधरी की बबू औरप पूर्व विघायक स्वर्गीय आनंद मोहन सिंह की पत्नी और विधायक अनीता देवी एक बार फिर जीत का सेहरा बांधने की कोशिश में हैं। वहीं जेडीयू ने यहां से नागेन्द्र चंद्रवंशी को चुनावी रणभूमि में उतारा है। साल 2020 में आरजेडी उम्मीदवार अनिता देवी ने जेडीयू उम्मीदवार नागेन्द्र चंद्रवंशी को पराजित कर दिया था। इस बार भी आरजेडी और जेडीयू के उम्मीदवारों के बीच चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा। इस सीट पर 11 प्रत्याशी चुनावी संग्राम में उतरे हैं।

करहगर में दिलचस्प त्रिकोणीय मुकाबला

करहगर सीट से पूर्व मंत्री गिरीश नारायण मिश्र के बेटे और कांग्रेस के विधायक संतोष कुमार मिश्रा दूसरी बार जीत की तलाश में चुनावी अखाड़े में उतरे हैं। वहीं जेडीयू की टिकट पर पूर्व विधायक वशिष्ठ सिंह उन्हें चुनौती दे रहे हैं। बीएसपी ने यहां पूर्व मंत्री रामधनी सिंह के बेटे उदय प्रताप सिंह पर दांव लगाया है। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज के टिकट पर लोकप्रिय भोजपुरी गायक और अभिनेता रितेश पांडेय पहली बार सियासी रणभूमि में अपना जौहर दिखाने के लिये बेताब है। करगहर , प्रशांत किशोर का गृह क्षेत्र भी है। साल 2020 में कांग्रेस उम्मीदवार संतोष कुमार मिश्रा ने जदयू उम्मीदवार वशिष्ठ सिंह को पराजित किया था। करहगर सीट पर 12 उम्मीदवार अपना जोर आजमा रहे हैं।

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काराकाट में पवन सिंह की पत्नी की चुनौती

काराकाट से CPI(ML) के टिकट पर विधायक अरूण सिंह एक बार फिर जीत की आस में चुनावी संग्राम में उतरे हैं, वहीं जेडीयू की टिकट पर पूर्व सांसद महाबली सिंह चुनावी दंगल में अपना बल दिखाने के लिये बेताब हैं। भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी समर में उतर आयी हैं। साल 2020 में CPI(ML) उम्मीदवार अरूण कुमार ने बीजेपी उम्मीदवार राजेश्वर राज को पराजित किया था। काराकाट सीट पर 13 उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरे हैं।

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