
बिहार की राजनीति में जब लालू परिवार का इकबाल बुलंद था, तब लालू यादव के साले साधु यादव का जलवा ही कुछ और हुआ करता था। कहा जाता था कि लालू-राबड़ी के शासन काल में साधु यादव का सिक्का पूरे बिहार में चलता था। लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती की शादी में पटना के शो रूम से गाड़ियां उठाने के मामले में साधु का नाम भी उछला था। वक्त ने पलटी मारी और साधु यादव के लालू परिवार से रिश्ते खराब होते चले गए। आज दोनों परिवार एक-दूसरे को देखना नहीं चाहता है। बिहार में जब विधानसभा चुनाव हो रहे हैं तब साधु यादव की कहीं चर्चा नहीं हो रही है। आज साधु यादव अपना राजनीतिक वजूद बचाए रखने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।
साधु यादव, लालू यादव के साले हैं। यही उनकी पहली पहचान रही है। हालांकि वो विधायक और सांसद भी रह चुके हैं। लालू यादव परिवार से रिश्ते खराब होते ही साधु यादव राजनीतिक रूप से हाशिए चले गए। आज जब बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं तो साधु यादव भी इस चुनाव में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। साधु यादव ने अपनी पत्नी को गोपालगंज विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है।
साधु यादव की पत्नी इंदिरा यादव बीएसपी की टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। इंदिरा यादव अपने पति साधु यादव के सांसद और विधायक रहते किए गए विकास कार्यों के नाम पर वोट मांग रही हैं। साधु यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अपने क्षेत्र का विकास ही उनका मूल मंत्र रहा है।
साधु यादव का कहना है कि वो गोपालगंज को सिंगापुर बनाना चाहते थे। उन्होंने विधायक और सांसद रहते हुए इस दिशा में प्रयास भी किए थे। लेकिन उनका सपना अधूरा रह गया। साधु यादव जिले में गोपालगंज में विकास की गति बनाए रखने के लिए उनकी पत्नी इंदिरा यादव को समर्थन देने की अपील कर रहे हैं। साधु यादव ने कहा कि इंदिरा यादव के जीतने पर गोपालगंज को सिंगापुर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
गोपालगंज से चुनावी मैदान में उतरीं इंदिरा यादव के पति साधु यादव के मुताबिक उन्हें जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। पहले भी उन्हें जनता का साथ मिला है। हालांकि गोपालगंज की राजनीतिक जमीन पर नजर डालें तो यहां पिछले 35 साल से आरजेडी, जेडीयू और बीजेपी का ही वर्चस्व रहा है। इस बार भी मुख्य मुकाबाला एनडीए और महागठबंधन के बीच में देखने को मिल रहा है। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुभाष सिंह ने जीत दर्ज की थी। इस बार मुकाबला जेडीयू और आरजेडी के बीच बताया जा रहा है।
साधु यादव की पत्नी इंदिरा यादव गोपालगंज से चुनावी मैदान में हैं और साधु यादव का दावा है कि बिहार में आने वाले समय में बीएसपी का जनाधार तेजी से बढ़ेगा। सभी वर्गों के बीच में बीएसपी का जनाधार बढ़ रहा है। साधु यादव ने इंदिरा यादव की मौजूदगी में गोपालगंज में मुकाबला त्रिकोणीय होने का दावा किया। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में इन्हें 45 हजार वोट मिले थे।
साधु यादव के जब अपने जीजा लालू यादव के साथ संबंध मधुर हुआ करते थे तब वो आरजेडी की टिकट पर विधायक और सांसद भी रह चुके हैं। साधु यादव ने साल 2000 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी की टिकट पर जीत दर्ज की थी। उसके बाद साल 2004 में वो आरजेडी की टिकट पर सांसद भी बने। लेकिन बाद में लालू परिवार से विवाद बढ़ने की वजह से उन्होंने आरजेडी छोड़ दी और गरीब जनता दल नाम से अपनी पार्टी बनाई थी।
साल 1999 में जब लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती की शादी हो रही थी। बताया जाता है कि उस वक्त पटना में कार के बंद शो रूम को खुलवाकर उसमें से गाड़ियां उठाई गई थीं और गाड़ियों को लौटाया भी नहीं गया था। उस वक्त इस पूरे प्रकरण में साधु यादव पर आरोप लगे थे। बताया जाता है कि लालू के दोनों साले साधु और सुभाष यादव की वजह से आरजेडी सरकार की जमकर किरकिरी हुई थी। लालू परिवार भी इन्हीं दोनों की गतिविधियों की वजह से उनकी सत्ता जाने का दोषी भी मानता है।
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