बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से कुछ समय पहले से ही सूबे में कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सवाल उठने लगे थे। विपक्ष की तरफ से नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छवि को लेकर सवाल पूछे जा रहे थे। चुनावी प्रक्रिया के दौरान मोकामा में हुई दुलारचंद यादव की हत्या ने सूबे के सियासी माहौल को और गरमा दिया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार गृह मंत्रालय का डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दिया है और सम्राट चौधरी भी प्रभार संभालते एक बार फिर नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छवि को बहाल करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
क्या अब यूपी स्टाइल में होंगे एनकाउंटर?
बिहार में पिछले दो दिनों में पुलिस और अपराधियों के बीच दो एनकाउंटर हो चुके हैं। जिसके बाद सोशल मीडिया पर ये सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या यूपी में जिस तरह योगी आदित्यनाथ की सरकार अपराधियों का एनकाउंटर करती है उसी तरह बिहार में भी अपराधियों से निपटा जाएगा। ये सवाल इस लिए उठ रहे हैं क्योंकि यूपी की तरह बिहार पुलिस भी पूरे एक्शन मोड में नजर आ रही है।
अपराधियों के खिलाफ एक्शन तेज
बिहार में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। बिहार में नई सरकार बनने के बाद पुलिस के एनकाउंटर अभियान की शुरुआत बाहुबलियों का गढ़ कहे जाने वाले बेगूसराय जिले से हुई है। जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र में बिहार STF और जिला पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर कुख्यात अपराधी शिवदत्त राय को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से पहले देर रात मल्हीपुर और शालीग्रामी गांव के बीच बदमाशों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई, इस दौरान बदमाश शिवदत्त राय घायल हो गया। जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दो दिन पहले भी हुआ था एनकाउंटर
दो दिन पहले भी बेगूसराय जिले में ही पुलिस और अपराधियों के बीच तेघड़ा में मुठभेड़ हुई थी। दियारा नदी के किनारे कुख्यात बदमाश नीरज सिंह उर्फ नीरज बॉस और उसके साथियों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में गोली लगने की वजह से बदमाश नीरज बॉस घायल हो गया था जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। हालांकि बदमाश नीरज बॉस के तीन-चार साथी मौके से फरार हो गए थे।
एनकाउंटर के बाद बोले सम्राट चौधरी
बेगूसराय में हुए इस एनकाउंटर के बाद गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर बिहार में सुशासन को स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले 20 साल से बिहार में लगातार सुशासन का राज स्थापित किया है और इसे बरकरार रखनी है। सम्राट चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदशन में पूरे बिहार में सुशासन की व्यवस्था कायम रखी जाएगी।
बिहार में ज्यादातर सीएम के पास रहा गृह मंत्रालय
बिहार में एक आध मौकों को छोड़ दें तो ज्यादातर समय गृह मंत्रालय का प्रभार मुख्यमंत्री के पास ही रहा है। साल 2025 में पहली बार नीतीश कुमार ने गृह मंत्रालय का प्रभार किसी और को दिया है। साल 2005 में से लेकर साल 2025 तक गृह मंत्रालय का प्रभार नीतीश कुमार के पास ही रहा, बीच में 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक 278 दिन मुख्यमंत्री रहे जीतन राम मांझी ने भी गृह मंत्रालय का प्रभार अपने पास रखा था। इससे पहले राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव ने भी मुख्यमंत्री रहते हुए गृह मंत्रालय का प्रभार अपने पास रखा था।
60 और 70 के दशक में गृह मंत्री अलग रहे
बिहार में बहुत कम ऐसे मौके आए हैं जब गृह मंत्रालय का प्रभार मुख्यमंत्री के पास नहीं रहा, इसका पहला उदाहरण 60 के दशक में देखने को मिला था, जब गठबंधन की सरकार का दौर शुरू हुआ था। दिसंबर 1970 में जब कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री बने तब उन्होंने उस वक्त के प्रमुख नेताओं में से एक रामानंद तिवारी को गृह मंत्रालय का प्रभार सौंपा था।