ईश्वर की इच्छा हुई तो… किस दम पर BMC की सरकार बनाने की उम्मीद जता रहे हैं उद्धव ठाकरे?

बीजेपी और शिवसेना ने ठाकरे परिवार के 30 साल के एकछत्र राज पर विराम लगाते हुए बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में 227 में से क्रमश: 89 और 29 सीट जीत लीं। विपक्षी शिवसेना (यूबीटी) और मनसे क्रमशः 65 और छह सीटें ही जीत सकी। फिर भी उद्धव ठाकरे बीएमसी में अपना मेयर बनाने की उम्मीद जता रहे हैं।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड17 Jan 2026, 07:47 PM IST
शिवसेना(यूबीटी) के नवनिर्वाचित पार्षदों से मिले उद्धव ठाकरे।
शिवसेना(यूबीटी) के नवनिर्वाचित पार्षदों से मिले उद्धव ठाकरे। (X handle @ShivSenaUBT_)

शिवसेना(यूबीटी) बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में दूसरे नंबर पर आई और सत्ता पाने के लिए जरूरी 114 सीटों के जरूरी आंकड़े से बहुत दूर रह गई है। दूसरी तरफ, बीजेपी और शिवसेना गठबंधन 118 सीटें पाकर स्पष्ट बहुमत की सीमा भी पार कर ली है। फिर शिवसेना(यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को लगता है कि बीएमसी में बीजेपी-शिवसेना की नहीं बल्कि उनके गठबंधन की सरकार बन सकती है जिसके सिर्फ 71 पार्षद चुने गए हैं।

उद्धव ने तीन दशक बाद खो दी पिता की दी हुई विरासत

स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे के नेतृत्व में तत्कालीन शिवसेना ने बीएमसी की सत्ता पर कब्जा किया था और उनके पुत्र उद्धव ठाकरे ने इस चुनाव में बीते तीन दशक का कब्जा खो दिया। चुनाव में मिली मात के बावजूद उद्धव ठाकरे ने शनिवार को कहा कि अगर ईश्वर की इच्छा हुई तो पार्टी मुंबई में अपना महापौर नियुक्त करने में सफल हो सकती है। उद्धव ठाकरे ने शनिवार को शिवसेना(यूबीटी) के कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत की।

राजनीतिक दल का नामविजयी उम्मीदवारों की संख्याविजयी उम्मीदवारों को मिले वैध मतकुल मतदान का %कुल विजयी उम्मीदवारों को मिले मतों का %
भारतीय जनता पार्टी (BJP)8911,79,27321.5845.22
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)657,17,73613.1327.52
शिवसेना (शिंदे गुट)292,73,326510.48
इंडियन नेशनल कांग्रेस242,42,6464.449.31
ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM)868,0721.252.61
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)674,9461.372.87
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP)324,6910.450.95
समाजवादी पार्टी (SP)215,1620.280.58
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)111,7600.220.45
कुल (Total)22726,07,61247.72100

बीजेपी पर धोखे से चुनाव जीतने का लगाया आरोप

उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा मुंबई को गिरवी रखना चाहती है और उसने धोखे से चुनाव जीता है। उन्होंने कहा कि मराठी मानुष इस पाप को कभी माफ नहीं करेंगे। ठाकरे ने कहा कि मुंबई में शिवसेना(यूबीटी) का महापौर बनाना उनका सपना है, और अगर ईश्वर की इच्छा हुई तो यह सपना साकार होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह गलतफहमी है कि उसने शिवसेना(यूबीटी) को खत्म कर दिया है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। ठाकरे ने कहा, 'शिवसेना को भाजपा जमीनी स्तर पर खत्म नहीं कर सकी।' प्रत्यक्ष रूप से उनका इशारा बीएमसी चुनावों में शिवसेना(यूबीटी) को 65 सीटों पर मिली जीत की ओर था। उद्धव ने पार्टी ने नवनिर्वाचित पार्षदों से मुलाकात की।

लड़ाई तो अभी शुरू हुई है: उद्धव ठाकरे

उद्धव ने आरोप लगाया कि भाजपा निष्ठा खरीदने के लिए साम-दाम दंड भेद का इस्तेमाल कर रही है। ठाकरे ने कहा, 'उसने (भाजपा ने) मुंबई को गिरवी रखकर विश्वासघात के जरिए जीत हासिल की है। मराठी मानुष इस पाप को कभी माफ नहीं करेंगे। लड़ाई अब खत्म नहीं हुई है, बल्कि अभी शुरू हुई है।' सवाल है कि आखिर उद्धव ठाकरे यह कैसे सोच पा रहे हैं कि बीएमसी में उनका मेयर बन सकता है? विपक्ष के सारे दलों की सीटें जोड़ देने के बाद भी 109 तक ही पहुंचती हैं जो मेयर बनाने के लिए जरूरी 114 सीटों से पांच कम है। तो क्या उद्धव ठाकरे बीजेपी गठबंधन के पार्षदों के टूटकर पाला बदलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं?

227 सीटों वाली बीएमसी में बीजेपी गठबंधन को बहुमत

ध्यान रहे कि बीएमसी के 227 सदस्यीय सदन में भाजपा ने 89 सीट जीतीं हैं, जबकि सहयोगी शिवसेना ने 29 सीट अपने नाम की है। वहीं, शिवसेना(यूबीटी) को 65 और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(मनसे)को छह सीट मिलीं। वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 24 सीटें, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) को आठ, अजित पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को तीन, समाजवादी पार्टी को दो और शरद पवार नीत राकांपा(एससीपी)को एक सीट मिली है।

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उद्धव ठाकरे को लगातार दर्द दे रहे हैं एकनाथ शिंदे

ध्यान रहे कि तत्कालीन शिवसेना को तोड़कर अलग पार्टी बनाने वाले एकनाथ शिंदे के गुट को ही असली शिवसेना की मान्यता मिली है। चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, उद्धव ठाकरे के हिस्से वाली शिवसेना अब शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे यानी शिवसेना (यूबीटी) के नाम से जानी जाती है। एकनाथ शिंदे ने पार्टी तोड़कर न केवल तत्कालीन शिवसेना, कांग्रेस, एनसीपी गठबंधन वाली महाराष्ट्र सरकार को गिरा दिया था बल्कि असली पार्टी भी अपने नाम कर ली और बीजेपी के साथ सत्ता में आ गए। शिंदे ने अब बीजेपी के साथ मिलकर ठाकरे परिवार को बीएमसी से भी बेदखल कर दिया।

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