SIR Exercise: चुनाव आयोग ने विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बड़ा ऐलान किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में SIR के सफलतापूर्वक लागू होने के बाद अब देश के दूसरे चयनित राज्यों में भी SIR के दूसरे चरण लागू किए जाएंगे। दूसरे चरण में देश के 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मैं छठ के मौके पर सभी को खासकर बिहार के 7.5 करोड़ मतदाताओं को नमन करता हूं।
बिहार में एसआईआर के बाद देश के सभी 36 स्टेट इलेक्शन कमिश्नरों के साथ 2 बैठक आयोजित की गई है। जिनमें देशभर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अनुभवों पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि SIR का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है। इस चरण में मतदाता सूची के अपडेशन, नए वोटरों के नाम जोड़ने और त्रुटियों को सुधारने का काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमने SIR की शुरुआत बिहार से की थी। यहां SIR कामयाब रहा। इसे लेकर राज्य में जीरो शिकायते मिली हैं।
इन राज्यों में होगा विशेष इंटेंसिव रिवीजन
जिन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR किया जाएगा, उनमें अंडमान और निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। यह घोषणा तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में होने वाले कई बड़े विधानसभा चुनावों से पहले की गई है। इन बताए गए 12 राज्यों में कल से SIR की प्रक्रिया शुरू होगी। फाइनल ड्राफ्ट लिस्ट 7 फरवरी 2026 को जारी किया जाएगा।
SIR वाले राज्यों में विधानसभा चुनाव कब
साल 2026
पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी
साल 2027
गोवा, गुजरात, उत्तर प्रदेश
साल 2028
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान। अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप में विधानसभा नहीं हैं।
21 साल पहले किया गया था आखिरी SIR
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि देश में 21 साल पहले आखिरी विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था। उन्होंने बताया कि SIR में सभी योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाएगा और अयोग्य मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर किया जाएगा। सीईसी ने आगे कहा कि चुनावों से पहले SIR किया जाना सबसे ज्यादा जरूरी है। लोगों का पलायन होता है। इससे एक से ज्यादा जगह वोटर लिस्ट में नाम रहता है। निधन के बाद भी कई लोगों को नाम लिस्ट में रह जाते हैं। यही कारण है कि वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण जरूरी होता है। बिहार में इसी के मद्देनजर पहला चरण पूरा किया गया है।