सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में जजों की सुरक्षा के लिए तैनात की सेंट्रल फोर्स; ममता सरकार को फटकार

West Begal SIR : सुप्रीम कोर्ट ने मालदा में जजों को बंधक बनाए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव सुधार ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए सेंट्रल फोर्स तैनात करने का आदेश दिया।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड2 Apr 2026, 01:13 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को लगाई फटकार

West Bengal Election: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्यूटी पर तैनात जजों को बंधक बनाए जाने की घटना को बेहद गंभीर माना है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह न्यायिक व्यवस्था को डराने की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के बड़े अफसरों की कड़ी फटकार लगाई और प्रदेश में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती का निर्देश दिया।

मालदा में जजों को भीड़ ने घेरा

मालदा जिले में बुधवार शाम करीब 3:30 बजे सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया। इनमें तीन महिला जज भी शामिल थीं। ये अधिकारी वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों के निशाने पर थे। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि इन अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया और आधी रात के बाद ही उन्हें छुड़ाया जा सका।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की भूमिका पर नाराजगी जताई। सीजेआई ने कहा, 'पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा पोलराइज्ड स्टेट है और यहां हर कोई राजनीतिक भाषा बोलता है।' कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट गई है। जस्टिस बागची ने भी कहा कि सभी नेताओं को एक सुर में इस घटना की निंदा करनी चाहिए।

हम किसी को भी न्यायिक अधिकारियों के मन पर मनोवैज्ञानिक हमला करने के उद्देश्य से हस्तक्षेप करने और कानून को अपने हाथों में लेने की अनुमति नहीं देंगे... यह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अपने कर्तव्य से विमुख होना भी है, और अधिकारियों को इसका कारण बताना होगा कि सूचित किए जाने के बाद भी उन्होंने अधिकारियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित क्यों नहीं की- सुप्रीम कोर्ट

आधी रात तक चला तनाव

कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने इस मामले में दखल दी थी। उन्होंने राज्य के डीजीपी और होम सेक्रेटरी को फोन किया, तब जाकर कार्रवाई हुई। कोर्ट ने नोट किया कि जब आधी रात के बाद जजों को निकाला जा रहा था, तब उनके वाहनों पर पथराव किया गया और डंडों से हमला हुआ। बेंच ने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और कानूनी प्रक्रिया को रोकने की एक सोची-समझी कोशिश लगती है।

यह भी पढ़ें | बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए BJP ने जारी की पहली लिस्ट

कोर्ट ने दिए कड़े निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई आदेश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और जिला मजिस्ट्रेट को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें 6 अप्रैल को कोर्ट में पेश होना होगा। साथ ही कहा कि इलेक्शन कमीशन (ECI) जजों के काम करने की जगह और उनके घरों पर सेंट्रल फोर्स तैनात करे। वहीं, सुनवाई के दौरान एक समय में 5 से ज्यादा लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति न दी जाए।

यह घटना न केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की एक बेशर्मी भरी कोशिश है, बल्कि यह इस न्यायालय के अधिकार को भी चुनौती देती है। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और छूटे हुए मामलों में आपत्तियों के निपटारे की चल रही प्रक्रिया को रोकने के लिए सोच-समझकर उठाया गया, किसी खास मकसद से प्रेरित कदम है।- मालदा की घटना पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया

सीबीआई या एनआईए करेगी जांच

कोर्ट ने बुधवार की घटना की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का निर्देश दिया है। इलेक्शन कमीशन को आदेश दिया गया है कि वह इस मामले की जांच सीबीआई (CBI) या एनआईए (NIA) से कराए। इन एजेंसियों को जांच की शुरुआती रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी होगी। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होने हैं।

एसआईआर के खिलाफ ममता सरकार का मोर्चा

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार ने चुनाव आयोग को उसके संवैधानिक दायित्व को पूरा करने के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है। चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची का शुद्धीकरण करता है। इसी के तहत, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया जाता है। प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) एसआईआर का यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि इसमें वैध लोगों के नाम भी मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।

प. बंगाल ने एसआईआर को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी थी जहां उन्हें मुंह की खानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व बताते हुए इसे पूरा करने में अपना सहयोग देने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही प. बंगाल में न्यायिक सेवा के सदस्यों को एसआईआर की प्रक्रिया में लगाया गया, लेकिन मालदा में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर उन्हें भी धमकाने की कोशिश हुई।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होमElectionसुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में जजों की सुरक्षा के लिए तैनात की सेंट्रल फोर्स; ममता सरकार को फटकार
More