
90 के दशक में बिहार में लालू और फिर राबड़ी नेतृत्व में सरकार चल रही थी। आरजेडी के बिहार में 15 साल के शासन को बिहार के इतिहास का सबसे खौफनाक काल माना जाता था। जिसकी वजह से सरकार अपना इकबाल खो चुकी थी, पूरे बिहार में बाहुबली अपनी-अपनी सरकार चला रहे थे और अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए गैंगवार करते थे। बाहुबलियों के इस खूनी खेल में आम जनता पिस रही थी। इस दौर के शहाबुद्दीन, अनंत सिंह, सूरजभान सिंह, आनंद मोहन, मुन्ना शुक्ला समेत दर्जनों ऐसे बाहुबलियों के नाम हैं जिन्होंने समय रहते अपना चोला बदल लिया और राजनीति में उतर आए। लेकिन बहुत सारे ऐसे गैंस्टर्स थे जिन्होंने राजनीति में घुसने की कोशिश तो जरूर की लेकिन सियासत की चौखट पर कदम रखने से पहले उनका एनकाउंटर हो गया। उन्हीं में से एक था अशोक सम्राट।
अशोक सम्राट जुर्म की दुनिया में एक ऐसा नाम था जिससे 90 के दशक में पुलिस भी थरथर कांपनी थी, इसकी वजह थी अशोक सम्राट उस वक्त AK-47 और AK-56 जैसे हथियारों का इस्तेमाल करता था। उस वक्त पुलिस के बास साधारण राइफल और रिवॉल्वर हुआ करता था और वो इन हथियारों की मदद से सम्राट अशोक का मुकाबला नहीं कर सकती थी। बेगूसराय की गलियों से लेकर रेलवे के ठेकों तक, उसकी तूती बोलती थी। यूपी के गोरखपुर से लेकर पश्चिम बंगाल और आसाम के कोने-कोने तक उसके नाम का सिक्का चलता था।
बेगूसराय के शोकहारा गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मा अशोक शर्मा बेजोड़ लड़का था। पढ़ाई में बहुत तेज था, डबल एमए की डिग्री हासिल की और फुटबॉल-वॉलीबॉल का अच्छा खिलाड़ी था। अशोक के पिता का सपना था कि बेटा दारोगा बने, लेकिन सम्राट की किस्मत ने उसे आतंक की दुनिया का सम्राट बना दिया। अशोक ने सबइंस्पेक्टर की परीक्षा पार कर ली थी, फिजिकल टेस्ट भी पास कर गया था लेकिन दोस्ती के चक्कर में वो दरोगा नहीं बन सका। कॉलेज के दिनों में अशोक शर्मा की की दोस्ती स्थानीय दबंग रामविलास चौधरी उर्फ मुखिया से हुई। एक बार जब रामविलास ने पारिवारिक तनाव में जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की, तो भावुक अशोक ने भी कट्टे से खुद को गोली मार ली। दोनों बच गए, लेकिन ये घटना अशोक के जीवन का टर्निंग पॉइंट थी। दोस्ती दुश्मनी में बदली और अशोक ने अपराध की राह पकड़ ली और अशोक शर्मा अशोक सम्राट बन गया।
अशोक सम्राट अपराध की दुनिया का वो बाहुबली था जिसने एक असाधारण छात्र से लेकर संगठित अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया। अपराध की दुनिया के साथ ठेकेदारी में भी उसने अपना साम्राज्य बढ़ाना शुरू कर दिया था। रेलवे ठेके, बरौनी रिफाइनरी और कोयला कारोबार पर उसका कब्जा था। वो नेताओं और बड़े कारोबारियों को संरक्षण देता था, और बदले में उसे राजनीति समर्थन मिलता था। बड़े-बडे नेता चुनाव जीतने, बूथ कैप्चरिंग और अपने पक्ष में मतदान करवाने के लिए अशोक सम्राट की मदद लेते थे। हत्या, रंगदारी, अपहरण, फिरौती उसके लिए बहुत साधारण बात थी। स्टाइलिश कपड़ों का शौकीन सम्राट अशोक नीले रंग की मारुति वैन में बैठकर हर वारदात को अंजाम देता था।
अपराध की दुनिया का सम्राट बन चुके अशोक की दुश्मनी उस वक्त के एक और अंडरवर्ल्ड डॉन और बाहुबली सूरजभान सिंह से छत्तीस का आंकड़ा था। दोनों के बीच रेलवे के ठेकों को लेकर खूनी गैंगवार होती रहती थी। उस वक्त बीजेपी नेता रामलखन सिंह और रनत सिंह के बीच रेलवे के ठेके को लेकर होड़ लगी रहती थी। सूरजभान सिंह, रामलखन सिंह की रीता कंस्ट्रक्शन और अशोक स्रमाट रतन सिंह की कमला कंस्ट्रक्शन को ठेका दिलाने के लिए जोर लगाते थे। कहते हैं अशोक सम्राट और सूरजभान सिंह दो भूमिहारों के वर्चस्व की जंग में बेगूसराय की गंगा किनारे की जमीन खून से लाल हो गई थी। अशोक सम्राट ने सूरजभान सिंह को कभी बेगूसराय में पैर नहीं जमाने दिया।
अशोक सम्राट जब अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया तब उसने राजनीति में प्रवेश करने की योजना बनाई। इस वक्त के दो बाहुबली नेता आनंद मोहन और बृज बिहारी प्रसाद से करीबी संबंध थे। इन दोनों की मदद से वो राजनीति में घुसने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान 1993 में उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव समेत उनकी पूरी सरकार को चुनौती दे डाली और इसी के साथ उसके एनकाउंटर की जमीन तैयार हो गई।
अशोक जब पटना में रहता था उसी दौरान उसको एक बैंक अधिकारी की बेटी से प्यार हो गया, वो लड़की भी उसे पसंद करने लगी। कहा जाता है कि दोनों ने भागकर शादी भी कर ली थी, लेकिन अशोक के घरवालों ने इस शादी को स्वीकार नहीं किया, हालांकि लड़की के घर वालों ने उसे अपना दामाद मान लिया था। 1995 में अशोक ने कुढनी से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था, इस दौरान उसकी पत्नी ने प्रचार की कमान संभाली थी, लेकिन वो हार गया।
5 मई 1995 को अशोक सम्राट रेलवे का टेंडर हासिल करने के लिए पटना से अपनी नीली मारुति वैन कार में हाजीपुर के लिए निकला, अशोक को पासवान चौक के पास पुलिस ने घेर लिया। अशोक ने अपनी कार दूसरी तरफ मोड़ दी और भागने लगा, इंसपेक्टर शशि भूषण शर्मा के नेतृ्त्व में पुलिस उसका पीछा करने लगी। इसी दौरान अशोक की कार पत्थर से टकराकर पलट गई और अपने दो साथियों के साथ पैदल दौड़कर भागने लगा। ग्रामीण इलाकों में इन तीनों के पहुंचने पर पुलिस ने डकैत-डकैत की आवाज लगाई जिसके बाद ग्रामीणों ने इन्हें घेर लिया और पुलिस ने तीनों का एनकाउंटर कर दिया। कहा जाता है कि जिस इंस्पेक्टर शशि भूषण शर्मा ने अशोक का एनकाउंटर किया था, किसी जमाने में उनकी बहन से अशोक की शादी की बात चल रही थी।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.