
बिहार में चाहे लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का, पिछले पांच दशक से बाहुबली इसमें निर्णायक भूमिका निभाते नजर आए हैं। शुरूआती दौर में नेता बाहुबलियों और दबंगों का इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए करते थे। लेकिन वक्त बदला और धीरे-धीरे खुद बाहुबली चुनाव मैदान में उतरने लगे। राजनीति, रसूख और सांसद-विधायक की कुर्सी का प्रभाव बाहुबलियों के दिलो दिमाग पर ऐसा छाया की आज तक उतरने को तैयार नहीं है। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भी बहुत सारे बाहुबली ऐसे हैं जो या तो खुद चुनावी मैदान में उतरे हैं या फिर अपने रिश्तेदारों को मैदान में उतारा है।
बाहुबली बनाम बहुबली कह लीजिए या फिर भूमिहार बनाम भूमिहार। मोकामा में बाहुबली अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की जोरदार टक्कर के लिए मैदान सज चुका है। 25 साल इन दो भूमिहार बाहुबलियों की टक्कर होने जा रही है। साल 2000 के विधानसभा चुनाव में बाजी सूरजभान सिंह के हाथ लगी थी। अब एक बार फिर उसी राजनीतिक पिच पर इन दोनों पुराने प्रतिद्वंदियों की टक्कर देखने को मिल रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार सबसे जोरदार सियासी घमासान मोकामा में देखे को मिलेगा।
छोटे सरकार उर्फ अनंत सिंह मोकामा में अपने बाहुबल की बदौलत पिछले 20 साल से एकछत्र राज करते आ रहे हैं। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने आरजेडी की टिकट पर जीत दर्ज की थी। जेल से छूटते ही राजनीति में वापसी का ऐलान कर चुके अनंत सिंह एक बार फिर खुद मोकामा के मैदान में उतर आए हैं। अनंत सिंह को जेडीयू ने अपना प्रत्याशी बनाया है। दूसरी तरफ इसी जमीन के एक दूसरे बाहुबली सूरभान सिंह भी मैदान में हैं। सूरभान सिंह की पत्नी वीणा देवी इस बार आरेडी की टिकट पर मोकामा विधनसभा सीट से मैदान में हैं।
मनोरंज सिंह उर्फ धूमल सिंह छपरा, सीवान, गोपालगंज जिले के लोग इस नाम से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। भूमिहार समाज से आने वाले धूमिल सिंह एक बार फिर चुनाव मैदान में उतर आए हैं। धूमल सिंह जेडीयू की टिकट पर छपरा जिले के एकमा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले साल 2020 में उन्होंने अपनी पत्नी सीता देवी को चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। धूमल सिंह बाहुबली होने के साथ राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं और नीतीश कुमार से उनके करीबी संबंध भी बताए जाते हैं।
शहाबुद्दीन, बस नाम ही काफी है। भले ही मोहम्मद शहाबुद्दीन आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन राजनीति में दिलचस्पी रखने वाला हर शख्स इनके नाम से वाकिफ है। शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा को लालू यादव की पार्टी ने टिकट दिया है। ओसामा सीवान जिले की रघुनाथपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। आरजेडी ने रघुनाथपुर से लगातार दो बार विधायक रहे हरिशंकर यादव का टिकट काटकर इन्हें मैदान में उतारा है।
पप्पू पांडेय, भोजपुरी बेल्ट का एक और बाहुबली चेहरा। ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले अमरेंद्र पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय गोपालगंज की कुचायकोट विधानसभा सीट से जेडीयू की टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। बाहुबली पप्पू पांडेय यहां से छठवीं बार चुनाव मैदान में हैं। इससे पहले वो इसी सीट से लगातार पांच बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड बना चुके हैं। पप्पू पांडेय ने साल 2005 में बहन मायावती की पार्टी बीएसपी से अपनी राजनीति की शुरूआत की थी। तभी से वो लगातार यहां से जीतते आ रहे हैं।
भोजपुर जिले की तरारी विधानसभा सीट इस बार दबंग सुनील पांडेय के परिवार की चुनावी दंगल का अखाड़ा बनी है। तरारी सीट से राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाले सुनील पांडेय के बेटे विशाल पांडेय बीजेपी की टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। वहीं भोजपुर जिले की ब्रह्मपुर विधानसभा सीट पर सुनील पांडेय के भाई हुलास पांडेय, चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) की टिकट पर दाव आजमा रहे हैं।