Bihar Election: बीजेपी इस बार बचा पाएगी हाजीपुर का गढ़? दांव पर केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय की साख!

हाजीपुर जिले में 8 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से दो सीट राघोपुर और महुआ विधानसभा सीट पर लालू यादव के दोनों बेटों की साख दांव पर है। वहीं हाजीपुर सीट पर बीजेपी के सामने अपना 25 साल पुराना किला बचाने की चुनौती है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय की इस राजनीतिक जमीन पर दिलचस्प मुकाबला देखे को मिल रहा है।

Rajkumar Singh
अपडेटेड27 Oct 2025, 11:46 AM IST
चिराग पासवान, नित्यानंद राय
चिराग पासवान, नित्यानंद राय(PTI)

साल 2000 का वो दौर जब बिहार में लालू-राबड़ी की पार्टी आरजेडी का शासन हुआ करता था, चुनाव विधानसभा का हो या लोकसभा का हार और जीत बाहुबल के दम पर तय किए जाते थे। उस दौरा में बीजेपी की नित्यानंद राय ने समाजवादियों के इस किले में सेंध लगाई थी, उसके बाद उन्होंने इसे अपना गढ़ बना लिया। नित्यानंद राय साल 2014 में लोकसभा चुनाव जीतकर दिल्ली चले गए। उस वक्त हुए विधानसभा के उपचुनाव में भी बीजेपी ने बाजी मारी थी। लेकिन इस बार समीकरण कुछ बदले हुए नजर आ रहे हैं।

बीजेपी का अभेद किला रहा है हाजीपुर

हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र को बीजेपी का अभेद किला माना जाता है। साल 2000 में बीजेपी के नित्यानंद राय ने समाजवादियों के इस गढ़ में सेंध लगाते हुए यहां कमल खिलाया था। इसके बाद पिछले 25 वर्षों से यहां से बीजेपी की लगातार जीतती रही है। इस बार बीजेपी के अवधेश सिंह सियासी पिच पर चौका जड़ने के प्रयास में है। वहीं आरजेडी ने देव कुमार चौरसिया को उनके मुकाबले में उतारा है। चौरसिया समता पार्टी के संस्थापक सदस्य में से एक हैं। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय साल 2000, फरवरी एवं अक्टूबर 2005 और 2010 में इस सीट पर जीत चुके हैं। साल 2014 में उनके सांसद बनने के बाद खाली हुई इस सीट पर 2014 में हुए उपचुनाव में भी बीजेपी के अवधेश सिंह ने जीत दर्ज कर ये सीट बरकरार रखी। इस सीट पर 12 प्रत्याशी दाव आजमा रहे हैं।

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महनार में जेडीयू की प्रतिष्ठा दाव पर

महनार विधानसभा सीट से जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा चुनावी अखाड़े में उतरे हैं, वहीं आरजेडी ने यहां रवींद्र कुमार सिंह पर दाव लगाया है। वर्ष 2020 के चुनाव में राजद प्रत्याशी पूर्व सांसद रामा किशोर सिंह की पत्नी वीणा देवी ने जेडीयू उम्मीदवार उमेश सिंह कुशवाहा को मात दी थी। वहीं साल 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए से अलग चुनाव लड़ रहे चिराग पासवान की पार्टी के प्रत्याशी रवींद्र कुमार सिंह तीसरे नंबर पर रहे थे। साल 2015 के चुनाव में उमेश कुशवाहा ने यहां जीत दर्ज की थी। पूर्व सांसद रामा किशोर सिंह यहां से 2005 फरवरी, 2005 अक्टूबर और 2010 में लगातार तीन बार जीत दर्ज विधायक बने थे। इस बार के चुनाव में वीणा देवी बेटिकट हो गयी हैं। इस सीट पर 18 उम्मीदवार चुनावी रण में उतरे हैं।

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लालगंज में बीजेपी के संजय सिंह मैदान में

लालगंज से बीजेपी ने विधायक संजय कुमार सिंह को फिर से भरोसा जताते हुए अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं आरजेडी ने यहां पूर्व बाहुबली विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला पर दाव लगाया है। लालगंज सीट साल 2000 से 2010 तक मुन्ना शुक्ला परिवार के पास रही है। मुन्ना शुक्ला साल 2000, फरवरी और अक्टूबर 2005 में चुनाव जीते थे, जबकि उनकी पत्नी अन्नू शुक्ला साल 2010 में इस सीट से विजयी हुई थीं। लालगंज विधानसभा क्षेत्र का बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री दीप नारायण सिंह ने तीन बार 1967,1969 और 1972 में प्रतिनिधित्व किया है। इस बार इस सीट पर 10 प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं।

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