आपसी मतभेद को पीछे छोड़कर महागठबंधन अब चुनाव मैदान में एकजुट उतर चुका है। साझा चुनावी रैली को लेकर मंथन चल रहा है, वहीं साझा घोषणापत्र को लेकर भी सभी घटक दलों के बीच चर्चा जारी है। बताया जा रहा है कि महागठबंधन 28 अक्टूबर को अपना साझा घोषणापत्र जारी कर सकता है। जिसमें स्थाई नौकरी, महिलाओं को 2500 रूपये, मां योजना, मुफ्त बिजली, 500 रुपये में गैस सिलेंडर, मुफ्त इलाज समेत तमाम योजनाओं की घोषणा की जा सकती है।
बिहार की सत्ता के महासंग्राम में दांव आजमा रहे महागठबंधन में तमाम गिले-शिकवे दूर हो गए हैं, भले ही सीट बटवारे को लेकर मतभेद रहे हों लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि साझा घोषणा पत्र में किसी भी दल को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। जिस तरह से तेजस्वी यादव ने अपना चुनावी घोषणापत्र तैयार किया है, उम्मीद है महागठबंधन के सभी दलों को इसपर सहमति होगी। इसमें कुछ नए मुद्दे भले ही जोड़े जाएं लेकिन इस बात की संभावना बहुत कम है कि जिन वादों का पिटारा तेजस्वी यादव ने जनता के सामने रखा है उसपर कोई ऐतराज होगा। बताया जा रहा है कि 28 अक्टूबर को महागठबंधन की तरफ से साझा घोषणापत्र जारी किया जा सकता है।
बिहार में महिला मतदाता सूबे की सत्ता दिलाने के लिए अहम कड़ी है। इस लिए दोनों गठबंधन की तरफ से महिलाओं को रिझाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। वहीं बिहार के जनता की दुखती रग मतलब रोजगार, पलायन और नौकरी पर भी महागठबंधन का विशेष जोर रहेगा। जिसका जिक्र तेजस्वी यादव कई बार कर चुके हैं। वहीं कानून व्यवस्था के मुद्दे को लेकर भी वो जिस तरह से नीतीश सरकार पर सवाल उठा रहे हैं वो भी एक असरदार मुद्दा हो सकता है।
महागठबंधन के साझा संकल्प पत्र में इस बार आर्थिक न्याय पर विशेष ध्यान देने की तैयारी है साथ ही इसमें रोजगार, शिक्षा, महिलाओं की भागीदारी और सामाजिक सुरक्षा पर भी ठोस वादे होंगे। बिहार के लिए महागठबंधन की तरफ से आरजेडी के अलावा कांग्रेस ने भी कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की रखी हैं। जिसमें महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये, 25 लाख तक का मुफ्त इलाज, भूमिहीन परिवारों के लिए 3 से 5 डिसमिल जमीन और अति लपिछड़ा वर्ग को न्याय दिलाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
गुरुवार को महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा आरजेडी के तेजस्वी यादव और उपमुख्यमंत्री का चेहरा मुकेश सहनी के नाम का ऐलान भी कर दिया गया है। राजस्थान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को महागठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर हमारी सरकार बनी तो उपमुख्यमंत्री मुकेश सहनी होंगे। उप मुख्यमंत्री और भी लोग बनाए जाएंगे, जो पिछड़े समुदाय से होंगे। महागठबंधन में कांग्रेस, आरजेडी और लेफ्ट पार्टियों के अलावा मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी शामिल है।
महागठबंधन के चुनावी घोषणा पत्र को झूठ का पुलिंदा बता रहे एनडीए की तरफ से उसी 20 साल पुराने मुद्दे पर आरजेडी को घेरने की कोशिश की जा रही है। एनडीए लालू यादव का जंगलराज और भ्रष्टाचार की याद दिला रहा है। वहीं नीतीश कुमार के पिछले 20 साल में किए गए कामों की चर्चा कर रहा है। जिसके जवाब में तेजस्वी यादव भी कानून व्यवस्था, अफसरशाही, भ्रष्टाचार, घूसखोरी, शिक्षा, रोजगार, पलायन और नौकरी के मुद्दे पर नीतीश सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
एनडीए की तरफ से कर्पूरी ठाकुर एक ऐसा मुद्दा हाथ लगा है, जिसे पूरा गठबंधन खासकर बीजेपी इसे भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। केंद्र की मोदी सरकार ने ही कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न सम्मान दिया है। बिहार के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री रहे थे जो अत्यंत पिछड़ा समाज से आते हैं। जन नायक कर्पूरी ठाकुर के गृहग्राम में पीएम मोदी की रैली का बिहार के 36 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग के वोटरों पर बड़ा असर हो सकता है।
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