शेयर बायबैक का ऑफर लेना फायदेमंद या होगा नुकसान? यह गणित जरूर समझ लीजिए

Share buyback tax rules 2025: कंपनियों के बायबैक ऑफर अब पहले जैसे फायदेमंद नहीं रहे। नए टैक्स नियमों और बोनस शेयरों की 'जीरो कॉस्ट' के कारण निवेशकों का मुनाफा कम हो सकता है। कोई भी फैसला लेने से पहले यह गणित जरूर समझ लीजिए।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड22 Dec 2025, 03:52 PM IST
शेयर बायबैक का गणित समझ लीजिए (AI Image)
शेयर बायबैक का गणित समझ लीजिए (AI Image)(Nano Banana)

How buyback tax works: अगर आप किसी कंपनी के बायबैक ऑफर में अपने शेयर बेचने की सोच रहे हैं, तो थोड़ी सावधानी जरूरी है। खासकर उन शेयरों के मामले में जहां कंपनी ने बोनस दिया हो। एक बार जब आप बायबैक में शेयर बेच देते हैं, तो आप उस कंपनी से मिलने वाले भविष्य के डिविडेंड, बोनस इश्यू और अन्य फायदों का हक खो देते हैं।

नए टैक्स नियमों का गणित समझना जरूरी

अक्टूबर 2024 से बायबैक से जुड़े टैक्स के नियम बदल गए हैं। अब बायबैक से मिलने वाली पूरी रकम को लाभांश यानी डिविडेंड माना जाता है। इस पर सीधे 10% टैक्स लगता है। मान लीजिए आपने इन्फोसिस का शेयर 1,600 रुपये में खरीदा था और कंपनी 1,800 रुपये में बायबैक कर रही है। अभी मार्केट में इसका रेट 1,545 रुपये के करीब है। ऊपर से देखने पर 1,800 रुपये का ऑफर अच्छा लगता है, लेकिन 10% टैक्स कटने के बाद आपके हाथ में सिर्फ 1,620 रुपये ही आएंगे।

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बोनस शेयरों पर टैक्स की दोहरी मार

बोनस शेयरों के मामले में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। टैक्स के नजरिए से बोनस शेयरों को खरीदने की लागत 'शून्य' मानी जाती है। इसका मतलब है कि बायबैक में इन शेयरों को बेचने पर जो भी पैसा मिलेगा, वह पूरी तरह आपकी कमाई मानी जाएगी और उस पर पूरा टैक्स लगेगा। इसमें आप खरीदारी की लागत दिखाकर टैक्स छूट का दावा नहीं कर पाएंगे।

कंपनियां क्यों लाती हैं बायबैक?

कंपनियां अक्सर अपनी बैलेंस शीट पर मौजूद फालतू कैश का इस्तेमाल करने के लिए बायबैक का सहारा लेती हैं। शेयर वापस खरीदने से बाजार में शेयरों की संख्या कम हो जाती है। इससे कंपनी की 'प्रति शेयर आय' (EPS) बढ़ जाती है, जिससे कंपनी का प्रदर्शन बेहतर दिखने लगता है। हालांकि, जरूरी नहीं कि इससे शेयर की मार्केट वैल्यू भी बढ़ जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनी पर कर्ज है, तो बायबैक के बजाय कर्ज चुकाना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।

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लंबी अवधि के फायदे और नुकसान देखें

निवेशकों को किसी भी बायबैक ऑफर को स्वीकार करने से पहले सभी पहलुओं को बारीकी से देखना चाहिए। केवल तुरंत मिलने वाले प्रीमियम को न देखें, बल्कि टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाली रकम और भविष्य में मिलने वाले मुनाफे की तुलना करें। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला ही आपके पोर्टफोलियो को सुरक्षित रख सकता है।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।

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