
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को चांदी की कीमत रिकॉर्ड 82.670 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने के बाद COMEX पर यह गिरकर 71.300 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। यानी रिकॉर्ड स्तर से 11.37 डॉलर या करीब 13.75% की गिरावट आई।
पिछले साल यानी की 2025 में मांग और आपूर्ति के असंतुलन के कारण चांदी की कीमतें लगभग 180% बढ़ीं। सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी की ओर जाने की घोषणा के बाद औद्योगिक मांग बढ़ी, जिससे कीमतें और चढ़ीं।
कुछ अन्य कारणों ने भी कीमतों को सहारा दिया, जैसे पेरू और चाड से सप्लाई में रुकावट, अमेरिका-वेनेजुएला तनाव और चीन द्वारा 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर परोक्ष रोक। हालांकि, अब कई विशेषज्ञ मान रहे हैं कि चांदी में निवेश करने वालों को मुनाफा बुक कर बाहर निकलना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतें अब बहुत ज्यादा हो गई हैं, जिससे इसकी इंडस्ट्रियल मांग पर असर पड़ सकता है। जब किसी कच्चे माल की लागत बहुत बढ़ जाती है, तो इंडस्ट्री उसके विकल्प तलाशने लगती है।
सोलर पैनल और फोटोवोल्टिक सेल पहले ही चांदी की जगह तांबे (कॉपर) का इस्तेमाल करने लगे हैं। बैटरी सेक्टर में भी चांदी की जगह तांबे के उपयोग की कोशिशें चल रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी या तो 82.670 डॉलर पर टॉप बना चुकी है, या फिर कुछ समय के लिए शॉर्ट-कवरिंग के कारण और बढ़ सकती है। ऐसे में यह फरवरी 2026 तक 100 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच सकती है। लेकिन FY27 (वित्त वर्ष 2026-27) में चांदी पर दबाव रहने की आशंका है और कीमतें 60 प्रतिशत तक गिर सकती हैं।
लाइवमिंट की रिपोर्ट के अनुसार, Pace 360 के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल ने बताया कि कोई भी इंडस्ट्री तभी तक किसी कच्चे माल को इस्तेमाल करती है जब तक वह आर्थिक रूप से फायदेमंद हो। कीमतें बहुत बढ़ने पर इंडस्ट्री विकल्प ढूंढती है।
उन्होंने कहा कि सोलर और बैटरी सेक्टर में चांदी की जगह तांबा अपनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इज़राइल, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और चीन की कई कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं। उनका मानना है कि चांदी या तो टॉप पर पहुंच चुकी है या फिर फरवरी 2026 तक 100 डॉलर के करीब जा सकती है।
अमित गोयल के अनुसार, हाल की तेजी बड़े संस्थानों की शॉर्ट-कवरिंग की वजह से है। इसलिए खुदरा निवेशकों को नई खरीद से बचना चाहिए। अगर चांदी 100 डॉलर तक जाती है, तो FY27 के अंत तक यह 40 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकती है। अगर 82.670 डॉलर ही टॉप साबित होता है, तो FY27 के अंत तक कीमत 35 डॉलर प्रति औंस तक भी गिर सकती है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करें और योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। बाजार की स्थितियां और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।)
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