Budget 2026: F&O ट्रेडिंग पर बढ़ा टैक्स, विदेशी निवेशक पर क्या पड़ेगा असर? जानें पूरी डिटेल

Budget 2026: सरकार ने F&O ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ा दिया है। यह कदम फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस से रिटेल निवेशकों रोकने के लिए उठाया गया है। आइए जानते हैं कि इसका विदेशी निवेशकों पर क्या असर होगा? 

Shivam Shukla
अपडेटेड1 Feb 2026, 03:10 PM IST
 F&O ट्रेडिंग पर बढ़ा टैक्स, विदेशी निवेशक पर क्या पड़ेगा असर?
F&O ट्रेडिंग पर बढ़ा टैक्स, विदेशी निवेशक पर क्या पड़ेगा असर?

Budget 2026 STT Hike: केंद्रीय बजट 2026-27 के ऐलान ने स्टॉक मार्केट ट्रेडर्स को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाने की घोषणा की है। यह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में ट्रेड करने वाले विदेशी निवेशकों के भी एक बड़ा रोड़ा साबित हो सकती है। जनवरी 2026 में पहले ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 41,000 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। ऐसे में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में हुई यह बढ़ोतरी डेरिवेटिव ट्रेडिंग करने वाले ग्लोबल फंड्स के लिए किसी दोहरी मार से कम नहीं है।

विदेशी निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?

बजट प्रस्तावों के मुताबिक, फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम पर लगने वाले टैक्स को 0.10% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा, 'ट्रांजैक्शन कॉस्ट में हुई इस बढ़ोतरी से भारत का डेरिवेटिव मार्केट ग्लोबल लेवल पर कम प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। खासतौर पर उन निवेशकों के लिए जो बहुत कम समय के लिए (High-frequency trading) पैसा लगाते हैं। अब भारत में दांव लगाना पहले जैसा फायदेमंद नहीं रहेगा। दरअसल, जब प्रॉफिट कम और खर्च ज्यादा होने लगता है, तो निवेशक उन बाजारों की ओर अपना रुख करते हैं, जहां नियम आसान और लागत कम करती है।

भूटानी इन्फ्रा के CEO आशीष भूटानी ने इसे स्ट्रक्चरल बदलाव करार दिया है। उन्होंने कहा, 'सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में बढ़ोतरी से विदेशी संस्थागत निवेशक शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग स्ट्रैटजी पर पुनर्विचार कर सकते हैं, लेकिन यह कदम भारत के कैपिटल मार्केट को सट्टेबाजी से दूर ले जाकर लॉन्ग टर्म और स्थिर निवेश की ओर मोड़ने का साफ संकेत है। उन्होंने आगे कहा कि रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे लॉन्ग टर्म वाले सेक्टर्स के लिए यह पॉजिटिव है, क्योंकि इससे घरेलू संस्थानों, REITs और लॉन्ग टर्म फंड्स की भागीदारी बढ़ेगी जो भारत के विकास पथ के अनुरूप धैर्यपूर्ण पूंजी देते हैं। मजबूत घरेलू निवेश आधार ही सतत विकास की नींव होता है।'

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STT बढ़ोतरी का शेयर बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

वहीं, जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा, "STT बढ़ने से पहली नजर में तो शेयर मार्केट को फायदा ही दिखता है, क्योंकि ऑप्शंस ट्रेडिंग अब महंगी हो जाएगी। लेकिन असल में पोर्टफोलियो के लेवल पर देखें तो डेरिवेटिव्स सेगमेंट पर पड़ने वाला असर निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने पर मजबूर कर सकता है। इससे आने वाले कुछ समय के लिए शेयर बाजार पर भी दबाव पड़ सकता है।

हालांकि, जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वी.के विजय कुमार ने कहा, STT बढ़ोतरी का F&O ट्रेडर्स पर लागू होगा। इसका FPI इन्वेस्टमेंट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने यह कदम F&O से रिटेल इन्वेस्टर्स को हतोत्साहित करने के लिए उठाया। SEBI के डेटा के मुताबिक, 92% ट्रेडर्स F&O में अपना पैसा गंवा देते हैं।


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