Budget 2026: क्या विदेशी निवेशकों की भगदड़ रोक पाएगा बजट? सीतारमण के सामने शेयर बाजार की सुस्ती हटाने की बड़ी चुनौती

Budget 2026: शेयर बाजार से लगातार विदेशी निवेशकों की निकासी ने भारतीय निवेशकों के सेंटीमेंट को पूरी तरह से चूकनाचूर कर दिया है। नए साल में भी उनकी बिकवाली जारी है। ऐसे में आज यानी 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2026 में सरकार इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठा सकती है? आइए विस्तार से जानते हैं। 

Shivam Shukla
अपडेटेड1 Feb 2026, 09:06 AM IST
Budget 2026: क्या विदेशी निवेशकों की भगदड़ रोक पाएगा बजट?
Budget 2026: क्या विदेशी निवेशकों की भगदड़ रोक पाएगा बजट?

Budget 2026: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आज, 1 फरवरी को बजट 2026 पेश करने जा रही है हैं। इस बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उम्मीद की जा रही है कि वे बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवली पर थोड़ा अंकुश लगा सकती हैं। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया की लगातार कमजोरी और टैक्स अर्जेस्टमेंट के बाद फीका रिटर्न दिया है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने 23 बिलियन यानी 2.3 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी से निकासी की है। इसमें से साल 2025 में 1.9 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई है। वहीं, नए साल में 400 करोड़ रुपये की बिकवाली की है।

विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए टैक्स में मिल सकती है छूट

जानकारों का कहना है कि शेयर मार्केट के लिहाज से बजट 2026 बेहद अहम मोड़ पर आया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह देखना होगा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इकोनॉमी में FDI और FPI फ्लो को आकर्षित करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) के लिए टैक्स में रियायत दे सकती है। यह भारत से विदेशी निवेशकों की निकासी पर रोक लगाने के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज का कहना है कि यह 'शेयर बाजार के लिए पॉजिटिव और कैश इक्विटी के लिए अनुकूल हो सकता है, हालांकि फर्म ने यह भी चेतावनी दी है कि यह हमारा मूल अनुमान नहीं है।'

सरकार FPI बेस बढ़ाने का रख सकती है प्रस्ताव

मॉर्गन स्टैंली के रीधम देसाई ने व्यापक रिफॉर्म की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा, यह पूरी तरह संभव है कि सरकार बजट में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) के बेस को बड़ा बनाने का प्रस्ताव रख सकती है, जिससे ज्यादा कैपिटल सोर्स को भारतीय स्टॉक्स तक पहुंच मिल सके। उन्होंने दो अन्य रिफॉर्म को भी हाईलाइट किया। उन्होंने बायबैक टैक्सेशन को आसान बनाना और GIFT City में टैक्स बेनिफिट्स को और बढ़ाने की बात कही है।

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LGCG में कटौती की मांग

इसके साथ ही उन्होंने विदेशी निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को कम करने की भी वकालत की है। मौजूदा समय में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन 12.50% पर है। इसमें कटौती से विदेशी निवेश अपने निवेश को 2 या 3 साल तक रोक सकेंगे। वहीं, अमेरिका विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए फेडरल रेट्स का ट्रंप कार्ड खेल रहा है। ऐसे में भारतीय नीति निर्माता प्रतिस्पर्धात्मक टैक्स के साथ विदेशी निवेशकों को लुभा सकती है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।

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