चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ने Cobrapost Report पर रखा अपना पक्ष, कंपनी पर लगा है ये आरोप

चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (CIFCL) ने आज कोबरापोस्ट रिपोर्ट के आरोपों पर अपना बयान दिया है। कंपनी लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। 

Shivam Shukla( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड23 Dec 2025, 05:14 PM IST
Cholamandalam Investments
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मुरुगप्पा ग्रुप की कंपनी चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (CIFCL) ने मंगलवार को अपने खिलाफ लगाए गए कॉरपोरेट मिस मैनेजमेंट के आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। दरअसल, कोबरापोस्ट वेबसाइट ने मुरुगप्पा ग्रुप की कुछ कंपनियों के खिलाफ ये मिस मैनेजमेंट आरोप लगाए हैं। वेबसाइट का दावा है कि उसने CIFCL, मुरुगप्पा ग्रुप से जुड़ी कंपनियों, परिवार के सदस्यों और टॉप मैनेजमेंट से जुड़े 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की पहचान की है।

कंपनी ने एक्सचेंजों से कही ये बात

कंपनी ने कोबरापोस्ट के आरोपों पर कहा, 'तथ्यों को चुनिंदा तरीके से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उद्योग की प्रचलित प्रक्रियाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है। कंपनी पुष्टि करती है कि उसका संपूर्ण संचालन देश के कानूनों एवं नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुरूप किया जाता है।' कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, 'सारे आरोप दुर्भावनापूर्ण एवं निराधार हैं और इन्हें निहित स्वार्थों के तहत लगाया गया है।' चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि पूर्व में दिए गए उसके मार्गदर्शन में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वह निदेशक मंडल की तरफ से स्वीकृत कारोबारी योजना के अनुरूप अपना प्रदर्शन जारी रखेगी।

इतनी है कंपनी की नेट वर्थ

बता दें कि 30 नवंबर 2025 तक कंपनी की नेट वर्थ 26,783 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 के समापन स्तर से 3,000 करोड़ रुपये अधिक थी। इसमें वित्त वर्ष 2023-24 में जारी 300 करोड़ रुपये के अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय डिबेंचरों (सीसीडी) का इक्विटी में रूपांतरण भी शामिल है। कंपनी के मुताबिक, बाकी 1,700 करोड़ रुपये की सीसीडी का अगले तीन तिमाहियों में रूपांतरण होने की उम्मीद है, जिससे उसकी नेट वर्थ और बढ़ जाएगी।

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कंपनी के पास 50 लाख से ज्यादा उधारकर्ता

कंपनी ने बड़े स्तर पर कैश डिपॉजिट को लेकर उठाए गए सवालों पर कहा कि वह मुख्य रूप से छोटे सड़क परिवहन संचालकों और स्वरोजगार से जुड़े गैर-पेशेवर उधारकर्ताओं की जरूरतों को पूरा करती है, जिनकी संख्या 50 लाख से ज्यादा है। ये उधारकर्ता देशभर में 1,700 शाखाओं के माध्यम से जुड़े हैं।

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लेखा परीक्षा कर रहा जांच

कंपनी के मुताबिक, ऐसे उधारकर्ता नकद में कमाते हैं और अपनी मासिक किस्तें (EMI) भी कैश में जमा करते हैं, जिसे बाद में बैंकों में जमा किया जाता है। इस कलेक्शन प्रक्रिया और रकम की आंतरिक एवं बाहरी दोनों स्तरों पर जांच होती रही है और यह वैधानिक लेखा परीक्षा के दायरे में आती है। संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन के बारे में कंपनी ने कहा कि सभी कानूनी एवं लेखा मानकों के अनुरूप इनका पूरा ब्योरा वित्तीय विवरणों में सार्वजनिक किया गया है।

इन लेनदेन से किसी व्यक्ति को अनुचित फायदा पहुंचने से भी कंपनी ने इनकार किया है। उसने कहा कि निदेशक मंडल सदस्यों एवं शीर्ष प्रबंधन अधिकारियों को किए गए सभी भुगतान कानून के अनुरूप हैं और शेयरधारकों को भी इनकी पूरी जानकारी दी गई है।

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