
Central Mine Planning & Design Institute IPO Details: शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से भारी गिरावट देखी जा रही है। इसी बीच, सरकार के स्वामित्व वाली कोल इंडिया की सहायक कंपनी सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (CMPDI) लिस्ट होने की तैयारी कर रही है। इसका इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) इसी सप्ताह लॉन्च होने जा रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इश्यू साल 2026 में अब तक के ठंडे पड़े प्राइमरी मार्केट की किस्मत बदल सकता है। इस सरकारी मिनी रत्न कंपनी को लेकर निवेशकों का उत्साह अभी से ग्रे मार्केट में दिखने लगा है।
CMPDI का इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) 20 मार्च को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है। वहीं, 24 मार्च तक निवेशक बोली लगा सकते हैं। कंपनी ने इसके लिए 163-172 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड फिक्स किया है। इस आईपीओ का साइज 1,842.12 करोड़ रुपये है। इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। कंपनी एक भी नया शेयर नहीं जारी करेगी। इसका मतलब है कि आईपीओ के जरिए जुटाया गया फंड शेयरधारकों के पास जाएगा, कंपनी की बैलेंसशीट में कोई बदलाव नहीं आएगा।
इसके बाद 25 मार्च को शेयर अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इसके अगले दिन यानी 26 मार्च को असफल निवेशकों का पैसा रिफंड कर दिया जाएगा। वहीं, 30 मार्च को CMPDI के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट होंगे।
सोमवार, 16 मार्च को CMPDI का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 21 रुपये के आसपास चल रहा है। यानी लिस्टिंग के दिन निवेशकों को लगभग 12% के मुनाफे की उम्मीद है। यह पूरी तरह से मार्केट की मौजूदा स्थिति पर निर्भर करता है और इसमें लगातार बदलाव होता रहता है। हालांकि 2026 का साल आईपीओ मार्केट के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा है। ट्रेंडलाइन के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल लिस्ट हुए ज्यादातर शेयर घाटे में चल रहे हैं।
साल 2026 में अब तक लिस्ट हुए आईपीओ में से केवल 13 हरे निशान ट्रेड कर रहे हैं, जबकि 35 कंपनियां अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रही हैं। औसतन लिस्टिंग गेन भी 3% से कम रहा है।
सेंट्रल माइन प्लानिंग के पास कोल और मिनरल एक्सप्लोरेशन के सेक्टर में लगभग 50 सालों का गहरा अनुभव है। यह कंपनी माइनिंग के साथ-साथ भारत सरकार के कोयला मंत्रालय की रणनीतिक सलाहकार भी है। इसका काम देश में कहां कोयले का भंडार है और उसका खनन कैसे होगा, इसकी पूरी योजना बनाना है।
वित्तीय मोर्चे पर भी कंपनी की स्थिति ठोस नजर आती है। दिसंबर 2025 को खत्म हुई नौ महीने की अवधि में कंपनी ने 425 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 9% अधिक है। कंपनी ने पिछले एक दशक में इसने 320 से अधिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स तैयार की हैं। आईडीबीआई कैपिटल और एसबीआई कैपिटल इस इश्यू का प्रबंधन कर रहे हैं।
बता दें कि इस आईपीओ के साथ इसकी पैरेंट कंपनी कोल इंडिया की भी चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, कोल इंडिया को जबरदस्त कमाई होने वाली है। कोल इंडिया इस इश्यू के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेच रही है। कोल इंडिया ने प्राइमरी मार्केट में इस कंपनी के शेयर महज 30 पैसे प्रति शेयर के औसत भाव पर खरीदे थे, लेकिन आईपीओ के लिए इसका अपर प्राइस बैंड 172 रुपये तय किया गया है। ऐसे में कोल इंडिया को अपने निवेश पर लगभग 57,233% का रिटर्न मिल रहा है। कोल इंडिया ने इस कंपनी के 10.71 करोड़ शेयर करीब 3.2 करोड़ रुपये में खरीदे थे। अब इस आईपीओ के जरिए कंपनी 1,842.12 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है। इसका मतलब है कि कोल इंडिया की तिजोरी में लगभग ₹1,839 करोड़ का नेट प्रॉफिट जाएगा।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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