
Crude Oil Prices: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले 10 से ज्यादा दिनों से जंग जारी है। इसका असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ता दिख रहा है। लेकिन, अब एक राहत भरी खबर आई है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रस्ताव के बाद आई है। IEA ने क्रूड ऑयल के दामों को कंट्रोल करने के लिए अपने इतिहास के सबसे बड़े इमरजेंसी रिजर्व को मार्केट में उतारने का प्रस्ताव रखा है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने तेल सप्लाई को लेकर जो डर पैदा किया था, अब ग्लोबल एजेंसियां उसे कम करने के लिए एक्टिव हो गई हैं।
बुधवार को ब्रेंट क्रूड के दाम 0.26% गिरकर 87.57 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) में 0.44% की कमी देखी गई। बता दें कि पिछले कुछ घंटों में ही कीमतों में 11% तक की बड़ी गिरावट भी दर्ज की गई थी। वहीं, पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों ने आसमान छूआ है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड के भाव लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। लेकिन, अब कीमतों में तेज गिरावट देखी जा रही है। मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से युद्ध जल्द खत्म करने के संकेतों के बाद गिरावट आई और आज IEA के प्रस्ताव के बाद कीमतें गिरी हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) इस बार अपने इतिहास का सबसे ज्यादा तेल रिजर्व जारी करने की तैयारी की है। इससे पहले साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय सदस्य देशों ने मिलकर 18.2 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारा था। इस बार का प्रस्ताव उस आंकड़े को भी पार कर सकता है। दुनिया के सात सबसे अमीर देशों (G7) ने भी अपनी ऊर्जा एजेंसियों को इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। ऐसे में जब बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ेगी, तो स्वाभाविक रूप से कीमतों का दबाव कम होगा, जिसका सीधा असर परिवहन लागत और आपकी जेब पर पड़ेगा।
बता दें कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का बाधित होना है। इस समुद्री रास्ते से ग्लोबल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। अमेरिका-ईरान युद्ध को शुरू हुए 10 दिनों से ज्यादा का समय बीत चुका है और फिलहाल इसके थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बाधित नहीं करने की चेतावनी दी है।
सोशल मीडिया प्लेफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा, अगर ईरान ने वहां माइने बिछाई हैं तो उन्हें तुरंत हटाना होगा, नहीं तो ईरान को अब तक की सबसे सख्त सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने लिखा, “अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई माइने बिछाई हैं और हमारे पास अभी तक ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है, तो हम चाहते हैं कि उन्हें तुरंत हटा दिया जाए! अगर किसी भी वजह से माइने बिछाई गई हैं और उन्हें फौरन नहीं हटाया गया, तो ईरान को मिलने वाली सैन्य कार्रवाई अब तक की सबसे भयानक स्तर की होगी।”
CNN की रिपोर्ट की मानें, तो ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री माइनें बिछाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से जुड़े दो सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिछले कुछ दिनों में वहां लगभग कई दर्जन माइनें पहले ही लगा दी गई हैं। यह खबर ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की तरफ से नेवी के साथ मिलकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर कंट्रोल हासिल करने के दावे के बाद आई है। IRGC ने हॉर्मुज से गुजरने वाले कोई भी जहाज, खासकर अमरिकी और इजरायली पर हमला करने की चेतावनी दी है।
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