Crude Oil Price: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध को 25 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं। इस तनाव ने एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है और ये 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई थी। हाालंकि, बाद में इसमें गिरावट आई। लेकिन, गुरुवार, 26 मार्च को एक बार फिर ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 103 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई, जबकि वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी 91 डॉलर के करीब बना हुआ है।
इस वजह से तेल की कीमतों में आया उछाल
गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान का हालिया बयान है। एक तरफ अमेरिका लगातार दावा कर रहा है कि दोनों देशों के बीच सीजफायर को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, जबकि दूसरी तरफ ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया है। ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त नियंत्रण की बात कर रहा है।
सिक्योरिटी फीस लगाने की तैयारी में ईरान
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान होर्मुज डलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर सिक्योरिटी फीस लगाने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता है, तो ग्लोबल ट्रेड की कॉस्ट में भारी उछाल आ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख भी दोहरी रणनीति वाला नजर आ रहा है। वे एक तरफ युद्ध रोकने को लेकर बातचीत की बात कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ हजारों संख्या में सैन्य अधिकारियों और सैनिकों की तैनाती कर दी है।
लाखों बैरल तेल की सप्लाई हुई ठप
होर्मुज जलडमरूमध्य का समुद्री रास्ता बाधित होने से हर दिन लाखों बैरल तेल की सप्लाई ठप हो गई है। इसका असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि डीजल और विमान ईंधन की कीमतों पर भी पड़ रहा है। तेल व्यापारियों का कहना है कि सप्लाई बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में दशकों बाद एक महीने के भीतर सबसे बड़ी बढ़त देखने को मिल रही है। टैंकर्स की आवाजाही नाममात्र रह गई है और ईरानी बलों की तरफ से जहाजों की सख्त जांच ने इस रास्ते को जोखिम भरा बना दिया है।