Economic Survey 2026: यूनियन बजट 2026 से पहले आज सरकार ने इकोनॉमिक सर्वे 2026 पेश कर दिया है। इस सर्वे में साफ तौर पर कहा गया कि दुनिया इस वक्त ऐसी नाजुक मोड़ पर खड़ी है, जहां राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता कभी भी एक संकट का रूप ले सकती है। इसने दस्तावेज में कहा गया है कि ग्लोबल इकोनॉमी में आने वाले बदलाव अब केवल अस्थायी नहीं है, बल्कि यह एक गहरी संरचनात्मक समस्या बनता जा रहा है।
सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण में पिछले साल के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सुरक्षित निवेश की तरफ लोगों का रुझान काफी तेजी से बढ़ा है। साल 2025 में सोने की कीमत 2,607 डॉलर से उछलकर 4,315 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया। यह एक इत्तेफाक नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि निवेशकों का अमेरिकी डॉलर से भरोसा कम हो रहा है और वे भू-राजनीतिक जोखिमों से डरे हुए हैं। आज पेश हुए सर्वे के मुताबिक, व्यापार अब फायदे या कुशलता के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संबंधों और सुरक्षा के आधार पर तय हो रहा है।
मैनेज्ड डिसऑर्डर सिनेरियो
सरकार ने अपनी रिपोर्ट में तीन संभावित स्थितियों का जिक्र किया है। ये स्थितियां 2026 में सामने आ सकती हैं। पहली स्थिति मैनेज्ड डिसऑर्डर की है। इसमें दुनिया 2025 की तरह ही चलती रहेगी, लेकिन असुरक्षा और बढ़ जाएगी। इसमें व्यापारिक झगड़े और वित्तीय तनाव तो रहेंगे, लेकिन सिस्टम पूरी तरह नहीं ढहेगा। सर्वे ने इस स्थिति की 40-45 प्रतिशत संभावना जताई है।
ये है दूसरा सबसे बड़ा खतरा
दूसरा परिदृष्य इससे भी ज्यादा गंभीर है। इसमें बहुध्रुवीय व्यवस्था के पूरी तरह टूटने का खतरा बताया गया है। इसकी भी संभावना 40-45 प्रतिशत आंकी गई है। इस परिदृष्य में रूस-यूक्रेन संघर्ष और अधिर अस्थिर हो सकता है। सोशल सिक्योरिटी सिस्टम चरमरा सकता है। इसके साथ ही देश एक दूसरे पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा सकते हैं।
2008 से भी बड़े आर्थिक संकट की आशंका
इकोनॉमिक सर्वे 2026 का तीसरा वैश्विक परिदृश्य सिस्टमैटिक शॉक कास्केड बताया गया है। हालांकि, इसकी संभावना बेहद कम 10-20 प्रतिशत ही जताई है। लेकिन अगर ऐसा हुआ तो, इसके परिणाम 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से भी बुरे हो सकते हैं। हालिया वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इन्फ्रास्ट्रक्टर में भारी निवेश हुआ है। सर्वे में कहा गया कि इस निवेश का ज्यादातर भाग कर्ज और जरूरत से ज्यादा उम्मीदों पर टिका हुआ है। अगर इस सेक्टर में कोई बड़ा रिफॉर्म या गिरावट आती है, तो यह ग्लोबल कैपिटल मार्केट को हिला कर रख देगा।