
Elitecon International Share price: शेयर बाजार में कभी-कभी ऐसे स्टॉक्स सामने आते हैं जो चुपचाप मल्टीबैगर बन जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है Elitecon International। बीएसई में लिस्टेड इस स्मॉल-कैप तंबाकू कंपनी ने पिछले पांच साल में करीब 5800% का जबरदस्त रिटर्न दिया है। अब लगातार तीसरे दिन इसमें तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी फिर बढ़ गई है।
19 फरवरी को यह शेयर ₹78.70 पर खुला। कारोबार के दौरान इसने ₹79.31 का इंट्राडे हाई और ₹76.10 का लो छुआ। लगातार तीसरे सत्र की बढ़त इस बात का संकेत है कि बाजार में इस स्टॉक को लेकर सकारात्मक धारणा बनी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिगरेट कंपनियों ने हाल ही में कीमतें बढ़ाई हैं। यह कदम एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी के असर को संतुलित करने के लिए उठाया गया है। सरकार ने 1 फरवरी को GST मुआवजा सेस खत्म करते हुए तंबाकू पर नई टैक्स व्यवस्था लागू की थी। नए ढांचे के तहत सिगरेट पर ₹2,050 से ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक तक एक्साइज ड्यूटी तय की गई है, साथ ही 40% GST भी लागू है। इससे कुल टैक्स बोझ काफी बढ़ गया है, जिससे मांग, मुनाफे और अवैध व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। हालांकि कंपनियां कीमत बढ़ाकर अपने मार्जिन को बचाने की कोशिश कर रही हैं।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि EBIT में गिरावट अब लगभग 2% तक सीमित रहने का अनुमान है, जबकि पहले 8–15% तक गिरावट की आशंका जताई जा रही थी। इसका मतलब यह है कि कंपनियों की रणनीति फिलहाल काम करती दिख रही है, और यही बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया की वजह बन सकती है।
बजट में नेशनल कैलेमिटी कंटिंजेंट ड्यूटी (NCCD) को लेकर भी अहम संशोधन किया गया है। तंबाकू उत्पादों पर NCCD की वैधानिक दर 25% से बढ़ाकर 60% करने का प्रावधान किया गया है, जो 1 मई 2026 से प्रभावी होगा। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल आधिकारिक अधिसूचना के जरिए प्रभावी दर 25% ही रखी जाएगी। यानी अभी सिगरेट कंपनियों पर अतिरिक्त कर बोझ नहीं पड़ेगा। लेकिन भविष्य में दर बढ़ाने का रास्ता खुला रखा गया है।
अभी राहत की बात यह है कि कंपनियों के मार्जिन पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा। लेकिन लंबी अवधि में अगर NCCD की दर वाकई बढ़ाई जाती है, तो लागत बढ़ सकती है और इसका असर मांग और मुनाफे दोनों पर पड़ सकता है।
एलीटकॉन इंटरनेशनल, तंबाकू से जुड़े अलग-अलग उत्पाद बनाती और बेचती है। इसमें सिगरेट के अलावा वे अन्य प्रोडक्ट्स भी शामिल हैं जो आम तौर पर तंबाकू की दुकानों पर मिलते हैं। कंपनी मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ ट्रेडिंग का काम भी करती है, यानी अपने प्रोडक्ट्स खुद बनाती भी है और बाजार में सप्लाई भी करती है।
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही (Q3) के वित्तीय नतीजों की घोषणा में हल्की देरी होगी। कंपनी ने हाल ही में कुछ अधिग्रहण किए हैं और अब उसे अपनी भारतीय और विदेशी सहायक कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों को एक साथ जोड़कर रिपोर्ट तैयार करनी है। इसी वजह से प्रक्रिया में समय लग रहा है।
फिलहाल कंपनी के वैधानिक ऑडिटर वित्तीय स्टेटमेंट्स की जांच कर रहे हैं ताकि सभी नियमों और ऑडिट मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। कंपनी ने कहा है कि वह ऑडिटर्स के साथ पूरा सहयोग कर रही है और जैसे ही समीक्षा पूरी होगी, नतीजे बिना देरी के स्टॉक एक्सचेंज को सौंप दिए जाएंगे। मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी अपने बिजनेस प्रदर्शन और गवर्नेंस मानकों को बेहतर बनाने पर लगातार ध्यान दे रही है।
5800% रिटर्न के बाद स्वाभाविक है कि निवेशक पूछें क्या अब भी इसमें दम है? स्मॉल-कैप शेयरों में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। टैक्स ढांचे में बदलाव, मांग की स्थिति और रेगुलेटरी जोखिम आगे भी असर डाल सकते हैं। ऐसे में निवेश से पहले जोखिम समझना जरूरी है।
Elitecon International का प्रदर्शन शानदार रहा है, लेकिन तंबाकू सेक्टर में टैक्स और नीति बदलाव हमेशा बड़ा फैक्टर रहते हैं। अगर आपके पास यह शेयर है तो नजर बनाए रखें, और अगर लेने का सोच रहे हैं तो पहले अपने जोखिम प्रोफाइल का आकलन जरूर करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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