नई दिल्ली: देश में कारोबार और निवेश का माहौल और बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार उन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्तावों की सीमा को 5,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15,000 करोड़ रुपये करने पर विचार कर रही है, जिनके लिए आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की मंजूरी जरूरी होती है। CCEA प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति है। इसमें गृह मंत्री और वित्त मंत्री जैसे केंद्र सरकार के प्रमुख कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
क्या है मौजूदा व्यवस्था?
मौजूदा FDI पॉलिसी के मुताबिक अगर किसी निवेश प्रस्ताव में कुल विदेशी इक्विटी फ्लो 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का होता है, तो संबंधित विभाग उस आवेदन को CCEA की मंजूरी के लिए भेजता है। इस लिमिट से नीचे के प्रस्तावों पर संबंधित मंत्रालय ही फैसला ले लेते हैं। मंजूरी की यह मौजूदा सीमा नवंबर, 2015 से लागू है और तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
लिमिट में बदलाव की जरूरत
सूत्रों ने बताया कि मौजूदा आर्थिक स्थितियों, महंगाई, पिछले सालों में निवेश के बढ़ते आकार और कारोबार सुगमता को बेहतर बनाने के मकसद को देखते हुए इस सीमा की समीक्षा करना जरूरी हो गया है। इससे पहले सचिवों की एक कमेटी ने भी अपनी बैठक में सरकारी मंजूरी वाले रास्ते से आने वाले FDI प्रस्तावों के लिए CCEA की लिमिट बढ़ाने का सुझाव दिया था। सूत्रों का कहना है कि यह प्रस्ताव अभी चर्चा के दौर में है।
रिकॉर्ड स्तर पर FDI फ्लो
इसके अलावा, विदेशी कैपिटल फ्लो बढ़ाने और रोजगार के नए मौके पैदा करने के लिए सरकार अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़े नियमों को भी आसान बनाने पर विचार कर रही है। बता दें कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ग्रॉस फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) फ्लो 30.7 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर रहा। इसके नेट फ्लो में बढ़ोतरी हुई। शुक्रवार को आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने एक कार्यक्रम में कहा कि पिछले वर्ष FDI ग्रॉस फ्लो रिकॉर्ड स्तर पर रहा, लेकिन भारत जैसे देश के लिए यह पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाने के लिए नीतिगत स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।