FII Outflow in September 2025: भारतीय शेयर बाजार से सितंबर महीने में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही। सितंबर में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 27163 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बचे। वहीं, साल 2025 में अब तक कुल 1,98,103 करोड़ रुपये का सेलऑफ हुआ है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने एनालिस्टों की बढ़ा दी है। इससे पहले, साल 2024 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल 1,21,210 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। हालांकि, मजबूत घरेलू निवेश और बेहतर कॉर्पोरेट अर्निंग की उम्मीदों ने बाजार को थोड़ा स्थिर किया है।
प्राइमरी मार्केट में बढ़ी रुचि
सितंबर में विदेशी निवेशकों ने इक्विटी मार्केट से 27163 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, लेकिन प्राइमरी मार्केट में निवेश को बढ़ाया है। बीते महीने उन्होंने 3,278 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह ट्रेंड लंबे समय से देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की यह स्ट्रैटजी ग्लोबल मार्केट्स में बेहतर रिटर्न और इंडियन मार्केट में हाई वैल्यूएशन के बीच बैलेंस को दिखाती है।
क्यों भाग रहे विदेशी निवेशक?
जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, पिछले एक साल के दौरान ग्लोबल मार्केट्स के मुकाबले इंडियन मार्केट का प्रदर्शन कमजोर रहा है। इस अवधि में इक्विटी मार्केट ने निगेटिव रिटर्न दिया है, जबकि अन्य ग्लोबल मार्केट्स ने बेहतर प्रदर्शन किया। FII भारत से कैपिटल निकाल कर उन मार्केट्स में लगा रहे हैं, जहां अधिक मुनाफा मिल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यह समझना बेहद जरूरी है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की इस स्ट्रैटजी से उन्हें काफी फायदा हुआ है।
घरेलू निवेश ने संभाला मोर्चा
हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद शेयर बाजार में लचीलापन दिखाया है। बेंचमार्क इंडेक्स हाई लेवल पर बने हुए हैं, जिसकी वजह डोमैस्टिक निवेश और अच्छे कॉर्पोरेट अर्निंग की उम्मीदें हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में स्थिरता को बनाए रखने ने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे यह पता चलता है कि भारतीय बाजार पूरी तरह से ग्लोबल कैपिटल फ्लो पर निर्भर नहीं है, लेकिन FII के सेलऑफ का असर मार्केट के मोमेंटम पर पड़ता है।