FPI Inflow: तीन महीने की बिकवाली के बाद FPI की वापसी, फरवरी में 8,100 करोड़ का निवेश, आखिर क्या बदला?

FPI Inflow: लगातार तीन महीनों की बिकवाली के बाद फरवरी की शुरुआत में एफपीआई भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार बने हैं। पहले हफ्ते में 8,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हुआ है। बेहतर जोखिम धारणा और ग्रोथ आउटलुक से बाजार में सकारात्मक संकेत दिख रहे हैं।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड8 Feb 2026, 01:19 PM IST
तीन महीने की बिकवाली के बाद FPI की वापसी, फरवरी में 8,100 करोड़ का निवेश
तीन महीने की बिकवाली के बाद FPI की वापसी, फरवरी में 8,100 करोड़ का निवेश(Pixabay)

FPI Inflow: काफी वक्त से शेयर बाजार से दूरी बनाए बैठे विदेशी निवेशक अब दोबारा दिलचस्पी दिखाने लगे हैं। लगातार तीन महीनों तक भारी बिकवाली करने के बाद फरवरी की शुरुआत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी एफपीआई भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार बन गए हैं। इससे बाजार में एक बार फिर पॉजिटिव सेंटिमेंट बनता नजर आ रहा है।

फरवरी के पहले हफ्ते में जोरदार निवेश

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी के पहले सप्ताह में एफपीआई ने भारतीय इक्विटी में 8,100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। 6 फरवरी तक का आंकड़ा देखें तो यह निवेश 8,129 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। लंबे समय बाद यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे थे।

जनवरी-दिसंबर में भारी निकासी

अगर पिछले महीनों पर नजर डालें तो जनवरी में एफपीआई ने 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये की निकासी की थी। यानी फरवरी की यह खरीदारी उस दौर के बाद आई है, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार दूरी बना रहे थे।

2025 में भी बाजार से बड़ी रकम निकाली

आंकड़े बताते हैं कि पूरे 2025 में एफपीआई ने भारतीय इक्विटी से कुल मिलाकर 1.66 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की थी। इसकी बड़ी वजहें रहीं- मुद्रा में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार तनाव, अमेरिका के शुल्क को लेकर अनिश्चितता और भारतीय शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन।

अब क्यों लौट रहा भरोसा

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रधान प्रबंधक (शोध) हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक हालिया खरीदारी यह दिखाती है कि निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ रही है। साथ ही भारत के ग्रोथ आउटलुक को लेकर एक बार फिर भरोसा बनता दिख रहा है। अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते से भी बाजार की धारणा को सहारा मिला है।

एफपीआई की वापसी को बाजार के लिए एक राहत भरा संकेत माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक संकेत, ब्याज दरों की दिशा और जियोपॉलिटिकल हालात यह तय करेंगे कि यह ट्रेंड कितना टिकाऊ रहता है।

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