
FPI Inflows India: भारतीय बाजार में एक बार फिर विदेशी निवेशकों की वापसी शुरू हो गई है, जिसका असर भी देखने को मिल रहा है। सितंबर तक लगातार तीन महीनों की बिकवाली के बाद अक्टूबर में फॉरेन इन्वेस्टर्स नेट वायर्स बने। मजबूत तिमाही रिजल्ट्स की शुरुआत, आकर्षक वैल्यूएशन और GST रिफॉर्म्स के बाद डोमैस्टिक ग्रोथ में सुधार के संकेतों ने फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के रुख को पॉजिटिव किया। इससे बेंचमार्क इंडेक्स रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंच गए। निफ्टी और सेंसेक्स सितंबर 2024 के ऑलटाइम हाई से महज 1.5 प्रतिशत दूर हैं।
नेशनल सिक्योरिटी डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के डेटा के मुताबिक, अक्टूबर महीने में अब तक फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) भारतीय शेयर बाजार में 7,362 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले, उभरते बाजारों में बेहतर मौकों की तलाश वे अरबों रुपये की निकासी किए थे, लेकिन अक्टूबर में ये तस्वीर एकदम बदल गई है। यह बदलाव मजबूत तिमाही रिजल्ट की शुरुआत, डोमैस्टिक ग्रोथ में रिकवरी के संकेत और आकर्षक वैल्यूएशन की वजह से आया है।
इससे पहले साल 2025 के पहले नौ महीनों में FPI केवल तीन महीनों में नेट बायर्स रहे। मई में सबसे बड़ा निवेश 19,860 करोड़ रुपये का हुआ, जबकि जनवरी में सबसे अधिक निकासी 78,027 करोड़ रुपये की देखने को मिली थी। तीन महीनों में कुल 76,619 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई। फिर भी, अक्टूबर का यह निवेश लगातार बिकवाली की स्पीड को स्लो कर दिया है।
हालांकि FPI की ताबड़तोड़ खरीदारी के बावजूद 2025 में टोटल आउटफ्लो अब तक 1.47 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है। पहले नौ महीनों में 1.56 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली हुई, जो जनवरी-सितंबर अवधि के लिए रिकॉर्ड लेवल पर दूसरी सबसे बड़ी बिकवाली है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध, आक्रामक वैश्विक ब्याज दर वृद्धि और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण 1.97 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी।
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