FPI Inflow: भारतीय बाजार में विदेशी निवेशक दनादन लगा रहे हैं पैसा, किस सेक्टर में हुई सबसे ज्यादा खरीदारी?

FPI Inflow: नवंबर में एफपीआई ने लगातार दूसरे महीने भारत में पैसा लगाया और बाजार को सहारा दिया। इक्विटी से निकासी हुई, लेकिन डेट और म्यूचुअल फंड में अच्छी रकम डाली। सालभर में कुल मिलाकर वे अभी भी ज्यादा बिकवाल रहे हैं, लेकिन नवंबर का रुख थोड़ा सकारात्मक दिखा।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम वार्ता)
अपडेटेड30 Nov 2025, 10:22 AM IST
FPI: मार्केट में विदेशी पैसों की बारिश, किस सेक्टर में सबसे ज्यादा खरीदारी?
FPI: मार्केट में विदेशी पैसों की बारिश, किस सेक्टर में सबसे ज्यादा खरीदारी?

FPI Inflow: पिछले हफ्ते शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और BSE की टॉप 10 कंपनियों में से 7 का मार्केट कैप 96,201 करोड़ रुपये बढ़ गया, जबकि बाकी तीन कंपनियों का मार्केट कैप 43,999 करोड़ रुपये कम हुआ। इसी तेज माहौल के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने भी नवंबर में भारतीय बाजारों में वापसी की है। लगातार दूसरे महीने FPI ने नेट इनफ्लो दिखाते हुए बाजार के मूड को और मजबूती दी।

नवंबर में FPI ने फिर दिखाई दिलचस्पी

CDSL के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में एफपीआई ने भारतीय पूंजी बाजार में 4,114 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। यानी बाजार से उन्होंने जितना पैसा निकाला, उससे ज्यादा वापस लगा दिया। यह लगातार दूसरा महीना है जब एफपीआई का रुख सकारात्मक रहा है।

कहां लगाया कितना पैसा?

एफपीआई ने नवंबर में डेट मार्केट में 4,674 करोड़ रुपये, म्यूचुअल फंड में 3,098 करोड़ रुपये, और हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट्स में 103.72 करोड़ रुपये का नेट निवेश किया।

हालांकि इक्विटी मार्केट में उनकी दिलचस्पी कमजोर रही और उन्होंने 3,765 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की।

पूरे साल का ट्रेंड

कैलेंडर ईयर के हिसाब से देखें तो अब तक एफपीआई सात महीने नेट सेलर रहे हैं और चार महीने नेट बायर।

  • सालभर में उन्होंने कुल मिलाकर 45,251 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है।
  • इक्विटी से उन्होंने 1,37,492 करोड़ रुपये निकाले, जबकि डेट में 87,250 करोड़ रुपये लगाया।
  • म्यूचुअल फंड से 3,101 करोड़ रुपये का नेट निवेश देखने को मिला।

क्या मतलब है इस ट्रेंड का?

एफपीआई का रुख नवंबर में थोड़ा सुधरा है, जिससे बाजार में स्थिरता का संकेत मिलता है। भले ही इक्विटी से निकासी हुई हो, लेकिन डेट और म्यूचुअल फंड में निवेश बताता है कि विदेशी निवेशक अभी भी भारत के लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल को मजबूत मानते हैं।

बाजार में हाल की तेजी और एफपीआई का दोबारा लौटना दोनों मिलकर ट्रेडर्स और निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहे हैं। आने वाले महीनों में ये देखना दिलचस्प होगा कि विदेशी निवेशक भारत को शॉर्ट-टर्म प्ले मानते हैं या इस बढ़ते ट्रेंड को लंबे समय तक बनाए रखते हैं।

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