FPI Outflow: विदेशी निवेशक लगातार निकाल रहे पैसा! अप्रैल में ही ₹48,000 करोड़ की बिकवाली

FPI Outflow: शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है, जिससे बाजार में दबाव बना हुआ है। इसके पीछे वैश्विक हालात और आर्थिक अनिश्चितता बड़ी वजह मानी जा रही है। आगे क्या होगा, यह कुछ अहम फैक्टर्स पर निर्भर करेगा।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड12 Apr 2026, 12:35 PM IST
विदेशी निवेशक लगातार निकाल रहे पैसा
विदेशी निवेशक लगातार निकाल रहे पैसा

FPI Outflow: भारतीय शेयर बाजार के लिए 2026 की शुरुआत उतार-चढ़ाव से भरी रही है।जहां आम निवेशक बाजार के संभलने की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। अप्रैल का महीना अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन विदेशी निवेशकों ने अपनी बिकवाली की रफ्तार को और तेज कर दिया है। दुनिया भर में जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच, विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाता दिख रहा है।

अप्रैल के 10 दिनों में ही 48,213 करोड़ की निकासी

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अप्रैल के पहले 10 दिनों में ही करीब 48,213 करोड़ (करीब 5.14 अरब डॉलर) के शेयर बेच दिए हैं। इससे पहले मार्च में भी भारी बिकवाली देखने को मिली थी, जहां कुल 1.17 लाख करोड़ की निकासी हुई थी, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। हालांकि फरवरी में थोड़ी राहत मिली थी, जब विदेशी निवेशकों ने 22,615 करोड़ का निवेश किया था।

इस साल कितना पैसा निकला?

एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी 1.8 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। यानि साफ है कि इस साल विदेशी निवेशकों का रुख लगातार बिकवाली की ओर ही बना हुआ है।

बिकवाली की असली वजह क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बिकवाली के पीछे कई बड़े कारण हैं। मॉर्निंगस्टार के हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं जियोजीत के वीके विजयकुमार का कहना है कि ऊर्जा संकट, रुपये की कमजोरी और भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका भी बिकवाली की बड़ी वजह है।

विदेशी निवेशक कहां जा रहे हैं?

एक और दिलचस्प बात यह है कि विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर दूसरे बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजार फिलहाल ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं, क्योंकि वहां बेहतर रिटर्न की उम्मीद है।

सीजफायर के ऐलान का भी असर नहीं

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा हुई थी, जिससे उम्मीद थी कि बाजार को राहत मिलेगी। लेकिन एंजल वन के वकार जावेद खान के मुताबिक, निवेशकों ने बाजार की तेजी का फायदा उठाकर अपनी हिस्सेदारी कम कर ली। यानि सीजफायर का असर फिलहाल निवेश के फैसलों पर ज्यादा नहीं दिखा।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेश फिर से कब आएगा, यह कुछ अहम फैक्टर्स पर निर्भर करेगा:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य का सामान्य होना
  • रुपये की स्थिरता
  • कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजे

अगर ये स्थितियां बेहतर होती हैं, तो बाजार में विदेशी निवेश वापस आ सकता है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए चिंता का संकेत जरूर है, लेकिन यह स्थायी स्थिति नहीं है। अगर वैश्विक हालात सुधरते हैं, तो निवेश का रुख भी बदल सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए समझदारी यही है कि जल्दबाजी से बचें और बाजार की दिशा को ध्यान से समझें।

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