FPI Outflow: बाजार से विदेशी निवेशकों का 'पलायन'! मार्च में निकाल लिए ₹88,180 करोड़, जानें क्या है वजह

FPI Outflow: मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी निकासी की है, जिससे बाजार में हलचल बढ़ी हुई है। इसके पीछे कई वैश्विक और घरेलू वजहें बताई जा रही हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे यह दबाव कितना बढ़ता है या हालात संभलते हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड22 Mar 2026, 01:34 PM IST
बाजार से विदेशी निवेशकों का 'पलायन', मार्च में निकाल लिए  <span class='webrupee'>₹</span>88,180 करोड़
बाजार से विदेशी निवेशकों का 'पलायन', मार्च में निकाल लिए ₹88,180 करोड़

FPI Outflow: भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला कुछ समय काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक तरफ जहां घरेलू निवेशक बाजार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं विदेशी निवेशकों यानी FPIs के रुख ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। दुनिया भर में मचे भू-राजनीतिक घमासान और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा क्यों निकाल रहे हैं और इसके पीछे के कारण क्या हैं।

मार्च में कितनी निकासी हुई?

एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। डॉलर में देखें तो यह रकम करीब 9.6 अरब डॉलर बैठती है। खास बात यह है कि मार्च में 20 तारीख तक एफपीआई हर कारोबारी सत्र में शुद्ध बिकवाल रहे। यानी उन्होंने लगातार शेयर बेचे और बाजार से पैसा बाहर निकाला।

हालांकि, यह निकासी बहुत बड़ी जरूर है, लेकिन अक्टूबर 2024 में हुई 94,017 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी से अभी भी थोड़ी कम है। फिर भी मार्च का यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि बाजार में इसकी चर्चा तेज है।

फरवरी में हुआ था सबसे ज्यादा निवेश

मार्च की इस भारी बिकवाली को समझने के लिए फरवरी का आंकड़ा भी देखना जरूरी है। फरवरी में यही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश करके खरीदार बने थे। यह 17 महीनों का सबसे ऊंचा निवेश आंकड़ा था। यानी एक महीने पहले तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में खरीदारी कर रहे थे, लेकिन मार्च आते-आते उनका रुख पूरी तरह बदल गया। हालिया निकासी को जोड़ दें तो साल 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं।

क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक?

बाजार के जानकारों ने इस भगदड़ के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं।

  • पश्चिम एशिया का तनाव और महंगा तेल: एंजल वन के एक्सपर्ट वकारजावेद खान के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष सबसे बड़ी वजह है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की खबरों से कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए हैं। जब तेल महंगा होता है, तो भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगाई का खतरा बढ़ जाता है, जिससे विदेशी निवेशक डर जाते हैं।
  • डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड का आकर्षण: मॉर्निंगस्टार इंडिया के हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड (प्रतिफल) बढ़ रहा है। जब अमेरिका में निवेश पर सुरक्षित और ज्यादा रिटर्न मिलता है, तो निवेशक भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर वाली संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं।
  • कमजोर होता रुपया: जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार के अनुसार, रुपये की लगातार गिरती कीमत और कंपनियों की कमाई घटने की आशंका ने निवेशकों के भरोसे को चोट पहुंचाई है।

इस समय एफपीआई की यह बिकवाली सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के मूड का इशारा भी है। विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और पश्चिम एशिया के हालात, तेल की कीमत, रुपये की चाल और वैश्विक संकेतों को बहुत ध्यान से देख रहे हैं।

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