FPI Outflow: 4 दिन में विदेशी निवेशकों ने निकाले 21,000 करोड़, क्या मिडिल ईस्ट की जंग ले डूबेगी आपकी कमाई?

FPI Outflow: मिडिल ईस्ट संकट के चलते विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से पिछले 4 दिनों में 21,000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। कच्चे तेल की कीमतें $90 के पार होने से निवेशक डरे हुए हैं। फरवरी की बंपर खरीदारी के बाद यह अचानक हुई बिकवाली बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड8 Mar 2026, 02:39 PM IST
FPI ने 4 दिन में निकाले  <span class='webrupee'>₹</span>21,000 करोड़
FPI ने 4 दिन में निकाले ₹21,000 करोड़

FPI Outflow: दुनिया में जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, उसका असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहता बल्कि वित्तीय बाजारों पर भी साफ दिखाई देता है। इन दिनों पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है और इसका असर भारतीय शेयर बाजार में भी देखने को मिल रहा है।

इसी बीच विदेशी निवेशकों ने पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार से बड़ी रकम निकाल ली है, जिससे बाजार में हलचल बढ़ गई है।

चार कारोबारी सत्रों में भारी बिकवाली

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 2 मार्च से 6 मार्च के बीच भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 21,000 करोड़ रुपये निकाल लिए। यह निकासी मुख्य रूप से कैश मार्केट में हुई, जहां विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री की।

गौर करने वाली बात यह भी है कि 3 मार्च को होली के कारण शेयर बाजार बंद था, फिर भी बाकी चार कारोबारी सत्रों में इतनी बड़ी निकासी दर्ज की गई।

फरवरी में आई थी भारी खरीदारी

दिलचस्प बात यह है कि इससे ठीक पहले फरवरी महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में जबरदस्त निवेश किया था। फरवरी के दौरान FPIs ने भारतीय इक्विटी में करीब 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह पिछले 17 महीनों में सबसे बड़ी मासिक खरीदारी मानी गई थी। यानी फरवरी में जहां विदेशी निवेशकों ने बाजार में पैसा डाला, वहीं मार्च की शुरुआत में अचानक बिकवाली देखने को मिली।

पिछले महीनों में भी जारी थी निकासी

फरवरी की खरीदारी से पहले विदेशी निवेशक लगातार तीन महीनों तक भारतीय बाजार से पैसा निकालते रहे थे।

आंकड़ों के अनुसार

  • जनवरी में FPIs ने 35,962 करोड़ रुपये निकाले।
  • दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये की निकासी हुई।
  • नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये बाजार से बाहर चले गए थे।

इससे साफ है कि विदेशी निवेशकों का रुख पिछले कुछ महीनों से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है।

क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस ताजा बिकवाली के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। एंजेल वन के वरिष्ठ बुनियादी विश्लेषक वकारजावेद खान के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इस डर के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे निवेशकों के बीच जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ गई।

जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो बड़े निवेशक आमतौर पर जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने लगते हैं। ऐसे समय में कई विदेशी निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर भारतीय शेयर बाजार में भी दिखाई देने लगता है।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से पैसा निकालना यह संकेत देता है कि वे फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं। भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन ग्लोबल संकट की आंच से कोई भी अछूता नहीं रहता। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ और तेल की कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में बाजार में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होममार्केटFPI Outflow: 4 दिन में विदेशी निवेशकों ने निकाले 21,000 करोड़, क्या मिडिल ईस्ट की जंग ले डूबेगी आपकी कमाई?
More