LIC में FPO के जरिए हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, SEBI की ये शर्तें होंगी पूरी

फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्रेटरी एम नागराजू ने सोमवार को कहा कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर में पब्लिक ऑफरिंग के ज़रिए इंश्योरेंस कंपनी LIC में अपनी हिस्सेदारी और कम करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। अगले वित्त वर्ष में FPO लाया जा सकता है।

Jitendra Singh
अपडेटेड3 Feb 2026, 08:40 PM IST
LIC में सरकार की 96.5 फीसदी हिस्सेदारी है।
LIC में सरकार की 96.5 फीसदी हिस्सेदारी है।

सरकार देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC (लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन) में अपनी हिस्सेदारी और कम करने पर विचार कर रही है। फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्रेटरी एम. नागराजू ने आज (2 फरवरी) कहा है कि अगले वित्त वर्ष में सरकार फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर यानी FPO के जरिए LIC के कुछ और शेयर बेच सकती है। इसका मकसद सरकार की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटाना और बाजार में ज्यादा हिस्सेदारी आम निवेशकों को देना है।

सरकार ने मई, 2022 में IPO के जरिए 902-949 रुपये प्रति शेयर के मूल्य दायरे में कंपनी में 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी। इस शेयर बिक्री से सरकार को करीब 21,000 करोड़ रुपये मिले थे। नागराजू ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि LIC के सार्वजनिक निर्गम को धीरे-धीरे कम करना होगा।

जानिए सरकार की LIC में कितनी है हिस्सेदारी

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, फिलहाल LIC में सरकार की हिस्सेदारी करीब 96.5% है। इससे पहले मई 2022 में सरकार ने LIC का IPO लाया था, जिसमें 3.5% हिस्सेदारी बेची गई थी। उस समय शेयर का प्राइस बैंड 902 से 949 रुपये रखा गया था और सरकार को इस बिक्री से करीब 21,000 करोड़ रुपये मिले थे। अब सरकार एक बार फिर हिस्सेदारी घटाने की तैयारी कर रही है, जिससे उसे अतिरिक्त फंड जुटाने में मदद मिल सकती है।

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सेबी की इन शर्तों को पूरा करना होगा

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार, एलआईसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों में कम से कम 10 फीसदी सार्वजनिक हिस्सेदारी होना जरूरी है। मौजूदा समय में सरकार के पास 96.5 फीसदी हिस्सेदारी होने के कारण, उसे मई 2027 तक इस नियम का पालन करना होगा।

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इसका मतलब है कि सरकार को अपनी 6.5 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचनी होगी ताकि सार्वजनिक शेयरधारिता 10 फीसदी तक पहुंच सके। हिस्सेदारी की बिक्री के समय, मात्रा और कीमत के बारे में निर्णय बाजार की स्थिति और अन्य आर्थिक परिस्थितियों को देखकर ही लिया जाएगा। नागराजू ने यह स्पष्ट किया कि यह कदम धीरे-धीरे उठाया जाएगा। इसका मकसद बाजार में स्थिरता बनाए रखना है।

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कब और कितने शेयर बिकेंगे?

LIC की कितनी हिस्सेदारी बेची जाएगी, शेयर की कीमत क्या होगी और यह बिक्री कब होगी-इन सभी बातों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार बाजार की स्थिति देखकर सही समय पर निर्णय लेगी।

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