Metal Stocks Today: हिंदुस्तान जिंक से लेकर वेदांता तक… आज मेटल शेयरों में जबरदस्त गिरावट, क्या है वजह?

Metal Stocks Today: गुरुवार को मेटल शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.5 प्रतिशत तक टूट गया। कमोडिटी कीमतों में गिरावट, मुनाफावसूली और ऊंचे वैल्यूएशन इसकी बड़ी वजह माने जा रहे हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड8 Jan 2026, 12:51 PM IST
मेटल शेयरों में जबरदस्त गिरावट
मेटल शेयरों में जबरदस्त गिरावट

Metal Stocks Today: गुरुवार, 8 जनवरी को मेटल सेक्टर में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.5% तक गिरकर 11,231.15 पर पहुंच गया। खबर लिखे जाने तक सभी 15 मेटल कंपनियों के शेयर लाल निशान में रहे। यह गिरावट घरेलू और ग्लोबल कमोडिटी प्राइस में कमजोरी के साथ-साथ निवेशकों की प्रॉफिट बुकिंग से जुड़ी रही।

सबसे ज्यादा नुकसान किसे हुआ

मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा नुकसान हिंदुस्तान जिंक को हुआ। यह शेयर करीब 5% गिरकर 599 के आसपास ट्रेड करता दिखा, जो अगस्त 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा NALCO में 4.3% और हिंदुस्तान कॉपर में 4.7% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि वेदांता करीब 3% फिसल गया।

स्टील कंपनियों पर भी दिखा दबाव

गिरावट सिर्फ नॉन-फेरस मेटल्स तक सीमित नहीं रही। जिंदल स्टील, SAIL और JSW स्टील जैसे स्टील शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। टाटा स्टील ने जरूर बाकी मेटल शेयरों के मुकाबले थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन वह भी नुकसान से नहीं बच पाया।

कमोडिटी कीमतों से जुड़ा है सीधा कनेक्शन

जानकारों के मुताबिक, मेटल शेयरों की यह गिरावट बेस मेटल और चांदी की कीमतों में आई कमजोरी से जुड़ी है। कॉपर और निकेल जैसे मेटल्स में 2% से ज्यादा की गिरावट आई है। रॉयटर्स के मुताबिक, शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज पर एल्यूमिनियम 1.99%, जिंक 1.40%, लेड 1.75% और टिन 1.53% नीचे रहे। चूंकि मेटल कंपनियों की कमाई और मार्जिन सीधे इन कमोडिटी कीमतों पर निर्भर करते हैं, इसलिए शेयरों पर असर पड़ा।

गिरावट की वजह

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से प्रॉफिट बुकिंग और स्ट्रेच्ड वैल्यूएशन की वजह से है।

INVAsset PMS के हर्षल दसानी ने कहा कि कमोडिटी साइकिल सीधी लाइन में नहीं चलती। तेजी के बाद अक्सर करेक्शन आता है और फिर से रिकवरी होती है। हाल के महीनों में मेटल शेयरों में तेज रैली आई थी, ऐसे में निवेशकों का मुनाफा निकालना स्वाभाविक है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के जी. चोक्कलिंगम ने बताया कि पिछले 30 सालों में मेटल स्टॉक्स जब भी 2-3 साल की ऊंचाई पर पहुंचे हैं, उसके बाद करेक्शन हुआ है।

वैल्यूएशन और ग्लोबल फैक्टर

कॉपर और जिंक जैसी कंपनियों का P/E रेशियो 20–30 तक पहुंच गया है, जबकि ऐतिहासिक रूप से यह 10–12 के बीच रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस, चीन और भारत पर नए टैरिफ की आशंका भी ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव डाल सकती है। रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित सैंक्शन का असर भी बाजार पर पड़ सकता है।

निफ्टी मेटल इंडेक्स पिछले साल 20% से ज्यादा बढ़ा था, लेकिन फिलहाल करेक्शन का दौर चल रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है और लंबी अवधि में कमोडिटी साइकिल फिर से संभल सकती है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहकर कदम बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।

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