Hindustan Zinc Share Price: वेंदांता ग्रुप की कंपनी हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में सोमवार को लगातार पांचवें दिन तेजी दर्ज की गई है। आज के कारोबार में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद 571.80 रुपये के लेवल पर 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर छुए हैं। यह उछाल चांदी की कीमतों में तेजी की वजह से देखने को मिल रही है। स्टॉक पर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Buy रेटिंग दी है। पिछले पांच सालों में यह स्टॉक 135 प्रतिशत का रिटर्न दे चुका है। वहीं, 6 महीने में 9 प्रतिशत और 1 महीने में 16 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हासिल की है।
660 रुपये के ऊपर जाएगा स्टॉक
जेफरीज का कहना है कि चांदी और जिंक की कीमतों में उछाल ने कंपनी की कमाई ग्रोथ को बढ़ा दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले सालों में कंपनी की कमाई में ज़बरदस्त वृद्धि देखने को मिलेगी। जेफरीज ने 660 रुपये का टार्गेट दिया है, जो मौजूदा कीमत से लगभग 22% की संभावित उछाल दिखाता है। इसमें लगभग 4% की डिविडेंड यील्ड भी शामिल है, यानी निवेशकों को मुनाफा कमाने के डबल मौके मिलेंगे।
चांदी ने 1 साल में 120% का दिया रिटर्न
दरअसल, 2025 में चांदी की कीमतों में 120% से अधिक का भारी उछाल आया है। वहीं, जिंक की कीमतें भी धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। हिंदुस्तान जिंक के पास इसका फायदा उठाने की बेहतरीन क्षमता है। ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि कंपनी की कम लागत वाली माइनिंग ऑपरेशन, मजबूत कैश फ्लो और कंपनी की कुल कमाई में चांदी की बढ़ती हिस्सेदारी ही उसके पॉजिटिव आउटलुक का आधार है।
ब्रोकरेज का अनुमान है कि कमाई के आंकड़े बाजार के औसत से 31% ज़्यादा हैं। ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में 22% और वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) में 29% की दमदार रफ्तार से बढ़ेगी। इसके बाद FY28 में भी 7% की वृद्धि जारी रहेगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जेफरीज के FY26-28 के EPS अनुमान बाजार के आम अनुमानों से 9% से लेकर 31% तक हाई हैं।
सिल्वर बिजनेस पर कंपनी का ज्यादा फोकस
कंपनी अब सिल्वर बिजनेस पर ज्यादा फोकस कर रही है। अब कंपनी की कुल परिचालन आय (EBIT) में चांदी की हिस्सेदारी लगभग 40% तक पहुंच गई है, जो इसके प्रीमियम वैल्यूएशन का मुख्य कारण है। कंपनी की प्लानिंग साफ है। वह Q2 FY29 तक अपनी सिल्वर प्रोडक्शन कैपिसिटी को 4% बढ़ाकर 830 टन प्रति सालाना करना चाहती है। इसके ही रिफाइंड मेटल उत्पादन क्षमता को भी 34% बढ़ाकर 1.5 मिलियन टन प्रति साल करने का लक्ष्य है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।