भारत में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार तेजी से विकसित हो रहा है। सही बॉन्ड चुनने के लिए अच्छी जांच-पड़ताल और सावधानीपूर्वक योजना जरूरी है। विदेशी और घरेलू दोनों निवेशक इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए जरूरी है कि वे एक स्पष्ट ढांचा अपनाएं ताकि वे सही कॉरपोरेट बॉन्ड का चुनाव कर सकें।
क्रेडिट क्वालिटी और जारीकर्ता की प्रोफाइल समझें
सही बॉन्ड चुनने के लिए आपको कंपनी की वित्तीय स्थिति को अच्छी तरह समझना चाहिए:
- सेकेंडरी मार्केट (द्वितीयक बाजार) की लिक्विडिटी देखें – ध्यान रखें कि कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, फिर भी यह सरकारी बॉन्ड की तुलना में कम लिक्विड है।
लक्ष्य और जोखिम सहनशीलता के अनुसार करें निवेश
- अगर आपका लक्ष्य पूंजी की सुरक्षा और मध्यम रिटर्न है, तो बेहतर रेटिंग वाली भरोसेमंद कंपनियों के बॉन्ड चुनें।
- अगर आप हाई रिटर्न चाहते हैं और थोड़ा ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं, तो अपेक्षाकृत कम रेटिंग वाले लेकिन विकास की संभावना वाली कंपनियों के बॉन्ड में निवेश पर विचार कर सकते हैं।
ध्यान में रखिये ये खास बातें
हमेशा नियामक और बाजार के रुझानों पर नज़र रखें। विदेशी निवेश और नियमों में होने वाले बदलाव आपके निवेश को प्रभावित कर सकते हैं। निवेश करने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।
अपनी जोखिम क्षमता, वित्तीय लक्ष्य और बॉन्ड की यील्ड व कंपनी की स्थिति को ध्यान में रखकर ही निवेश का निर्णय लें। अगर आप जारीकर्ता की क्रेडिट योग्यता, ईमानदारी और बॉन्ड की अवधि को ध्यान में रखकर निर्णय लेते हैं, तो आप अपने पोर्टफोलियो के लिए सही कॉरपोरेट बॉन्ड चुन सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करें और योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। बाजार की स्थितियां और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।)