IDBI Bank News: पिछले कुछ दिनों से आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) काफी सुर्खियों में बना हुआ है। अब इसके निजीकरण को लेकर एक बड़ी अपडेट सामने आई है। सालों से बैंक को बेचने की कोशिशों में जुटी केंद्र सरकार अब अपनी स्ट्रैटजी में बड़ा फेरबदल करने की तैयारी कर रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक, सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से बैंक में अपनी हिस्सेदारी कम करने पर विचार कर रही है। यह कदम पिछले सप्ताह हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया रद्द होने के बाद उठाया जा रहा है ।
सरकार बेचना चाहती है 60% हिस्सेदारी?
दरअसल, केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर IDBI Bank की लगभग 60.72% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना चुके थे। इसके लिए पूरी तैयारी हो चुकी थी और बोलियां भी आमंत्रित की गई थीं। फरवरी 2026 में एमिरेट्स एनबीडी बैंक और प्रेम वत्स की फेयरफैक्स इंडिया जैसी बड़ी कंपनियों ने अपनी वित्तीय बोलियां भी जमा की थीं। लेकिन, जब ये बोलियां सरकार से तय किए गए रिजर्व प्राइस से कम रह गईं, तो इसे रद्द कर दिया गया।
सरकार क्यों चुन रही OFS का रास्ता?
बता दें कि मौजूदा समय में आईडीबीआई बैंक में पब्लिक फ्लोट स्टेक केवल 5.29% है। किसी भी लिस्टेड कंपनी के लिए इतनी कम पब्लिक हिस्सेदारी होना उसके शेयरों की फेयर वैल्यू का पता लगाने के लिए बड़ी चुनौती है। सरकार का मानना है कि अगर OFS के माध्यम से बाजार में 10 से 15 फीसदी अतिरिक्त शेयर उतारे जाते हैं, तो बैंक की वैल्यूएशन ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद हो जाएगी।
2016 से चल रही है हिस्सेदारी बेचने की जद्दोजहद
गौरतलब है कि IDBI Bank के निजीकरण की जद्दोजहद कई सालों से चल रही है। पहली बार साल 2016 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण में इसका ऐलान किया था। हालांकि, शुरुआती समय में बैंक के खराब लोन और कम वैल्यूएशन के कारण निजीकरण नहीं हो सका। बैंक को डूबने से बचाने के लिए 2019 में LIC आगे आई और लगभग 21,624 करोड़ रुपये निवेश कर 51% हिस्सेदारी हासिल की। इसके बाद ही RBI ने इसे प्राइवेट सेक्टर बैंक की कैटेगरी में डाला था। मौजूदा समय में LIC के पास 49.24% और सरकार के पास 45.48% हिस्सेदारी है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।