IDFC फर्स्ट बैंक ने लौटा दिया हरियाणा सरकार का पैसा, क्या अब शेयर खरीदना चाहिए? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

IDFC First Bank के शेयरों में मंगलवार को तेजी आई। फिर भी सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या फर्जीवाड़े की घटना के बाद निवेशकों को सतर्क हो जाना चाहिए? एक्सिस सिक्यॉरिटीज ने अपने आकलन में इस सवाल का जवाब दिया है।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड24 Feb 2026, 10:15 PM IST
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयर खरीदें या बेचें?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयर खरीदें या बेचें?

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार का पूरा पैसा जमा कर दिया है। इस प्राइवेट बैंक ने मंगलवार को कहा कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों के खातों में मूलधन एवं ब्याज समेत पूरी राशि जमा करा दी है जो कुल मिलाकर 583 करोड़ रुपये है। मंगलवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयर एनएसई पर 0.93 अंक (1.33 %) चढ़कर 70.97 रुपये जबकि बीएसई पर 0.93 (+1.33%) मजबूत होकर 70.97 रुपये पर चला गया। सवाल है कि क्या आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में निवेश जारी रखें या फिर निकल जाएं? ब्रोकरेज हाउस एक्सिस सिक्यॉरिटीज ने अपनी राय दी है।

IDFC ने शेयर बाजार को दी हरियाणा सरकार के पैसे लौटाने की सूचना

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, 'मामले की जांच जारी होने के बावजूद बैंक ने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों द्वारा दावा की गई मूलधन और ब्याज की समूची राशि का भुगतान कर दिया है, जो शुद्ध रूप से 583 करोड़ रुपये है।' वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी बैंक से पैसे मिलने की पुष्टि कर दी है।

हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 के दौरान बैंक का रिटर्न (RoA/RoE) 1-1.2%/9-12% के करीब रहेगा, जबकि वित्त वर्ष 2026 में इसके 0.4/3.7% रहने का अनुमान है।- एक्सिस सिक्यॉरिटीज

सीएम सैनी ने भी कहा- बैंक ने लौटा दिए पैसे

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले पर विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक मामले में करीब 556 करोड़ रुपये की राशि वापस हासिल कर ली है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'लगभग 22 करोड़ रुपये के ब्याज समेत करीब 556 करोड़ रुपये 24 घंटे के भीतर ही वापस आ गए।' उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार के विभागों से संबंधित पूरी राशि दोबारा खातों में जमा करा दी गई है और यह वसूली 24 घंटे के भीतर हुई है।

एक्सिस सिक्यॉरिटीज ने IDFC बैंक के लिए घटाया अनुमान

ब्रोकरेज हाउस एक्सिस सिक्यॉरिटीज ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की अर्निंग एस्टिमेट में कटौती की है। इसने कहा, 'हमने इस धोखाधड़ी के पूरे असर को ध्यान में रखते हुए, वित्त वर्ष 2026 (FY26) की अनुमानित कमाई में 23% की भारी कटौती की है। हालांकि, हमें उम्मीद है कि इस घटना का आगे कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा, इसलिए हमने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए कमाई के अनुमान को पहले जैसा ही रखा है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सबसे बड़ी ताकत उसके रिटेल डिपॉजिट्स हैं, और हमें उम्मीद है कि बैंक की ग्रोथ की रफ्तार बैंकिंग सिस्टम की तुलना में काफी बेहतर बनी रहेगी। वर्तमान में बैंक का वैल्यूएशन (1.2x/1.1x FY27/28E ABV) सही लग रहा है।'

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एक्सि सिक्यॉरिटीज ने IDFC बैंक को दी कौन सी रेटिंग?

ब्रोकरेज हाउस ने कहा, 'शेयर की कीमत में बड़ा उछाल तभी आएगा जब बैंक अपने कामकाज को पूरी सटीकता के साथ जारी रखे, डिपॉजिट ग्रोथ को सिस्टम से तेज बनाए रखे और साथ ही अपने इंटरनल कंट्रोल को और मजबूत करे। हम इस शेयर पर अपनी 'BUY' (खरीदने) की सलाह को बरकरार रखते हैं, लेकिन इसका टारगेट प्राइस बदलकर 87 रुपये प्रति शेयर कर दिया है जो मौजूदा कीमत से 24% अधिक है। हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 के दौरान बैंक का रिटर्न (RoA/RoE) 1-1.2%/9-12% के करीब रहेगा, जबकि वित्त वर्ष 2026 में इसके 0.4/3.7% रहने का अनुमान है।'

590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की खबर से फैली सनसनी

वहीं, बैंक ने कहा कि वह कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और राज्य सरकार के विभागों के साथ मिलकर इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा और अपनी देनदारियों की वसूली के लिए प्रयासरत रहेगा। बैंक ने चंडीगढ़ की एक शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का रविवार को खुलासा किया था।

चंड़ीगढ़ की एक शाखा तक सीमित है फर्जीवाड़ा

मुख्यमंत्री के मुताबिक, बैंक ने सरकार को सूचित किया है कि मामला चंडीगढ़ की एक शाखा से जुड़ा है, जिसमें मध्य और निचले स्तर के चार-पांच बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे बैंक कर्मचारी हों, निजी व्यक्ति हों या सरकारी कर्मचारी हों।

एयू स्मॉल फाइनैंस से भी हरियाणा सरकार ने तोड़ा नाता

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने पहले कहा था कि यह धोखाधड़ी हरियाणा सरकार से जुड़े सीमित खातों तक ही सीमित है और चंडीगढ़ शाखा के अन्य ग्राहकों पर इसका कोई प्रभाव नहीं है। मामला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को भी सरकारी कामकाज की सूची से हटाने का निर्णय लिया है।

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