
IDFC First Bank Share Fall Today 23 Feb 2026: शेयर बाजार में सोमवार को अच्छी तेजी देखने को मिल रही है। लेकिन इसी बीच IDFC First Bank के शेयरधारकों को बड़ा झटका लगा है। इसके शेयर सोमवार, 23 फरवरी के शुरुआती कारोबार में 20 फीसदी के लोअर सर्किट पर पहुंच गए। यह भीषण बिकवाली बैंक के चंडीगढ़ ब्रांच में 590 करोड़ रुपये के बड़े फ्रॉड के खुलासे के बाद आयी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर आज IDFC First Bank के शेयर 75.16 रुपये के भाव पर कामकाज के लिए खुले, लेकिन कुछ ही देर में ये 66.80 रुपये के स्तर पर पहुंच गए।
दरअसल, बीते दिनों हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक से अपना खाता बंद करने और फंड को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था, लेकिन बैंक अधिकारियों ने जब इस प्रकिया को शुरू किया तो उनके होश उड़ गए। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक खाते में जितनी रकम होनी चाहिए थी और बैंक के सिस्टम में जो बैलेंस दिख रहा था, उनमें जमीन-आसमान का अंतर था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि चंडीगढ़ स्थित इस ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने मिलकर सरकारी खातों के साथ हेराफेरी की है। IDFC Bank ने एक्सचेंज फाइलिंग में स्वीकार किया है कि लगभग 590 करोड़ रुपये की रकम का मिलान नहीं हो पा रहा है। यह गबन किसी बाहरी हैकर ने नहीं, बल्कि बैंक के कर्मचारियों ने ही किया है।
इस खुलासे के तुरंत बाद हरियाणा सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है। वित्त विभाग ने एक आपातकालीन सर्कुलर जारी करते हुए IDFC First Bank और AU Small Finance Bank दोनों को सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से डी-एम्पैनल यानी बाहर कर दिया है। सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि भविष्य में इन बैंकों में राज्य का कोई भी पैसा जमा या निवेश नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा, सभी सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों को निर्देश दिया गया है कि वे इन दोनों बैंकों में मौजूद अपने खातों को तुरंत बंद करें और पूरी रकम दूसरे बैंकों में शिफ्ट करें। सरकार का आरोप है कि बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नियमों का उल्लंघन किया। अधिक ब्याज वाले फंड को बचत खातों में रखा, जिससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है।
IDFC First Bank ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इंटर्नल जांच शुरू कर दी है। बैंक ने अब तक चार अधिकारियों को सस्पेंड किया है और उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया है। बैंक प्रशासन का कहना है कि यह फ्रॉड केवल चंडीगढ़ की एक ब्रांच और कुछ चुनिंदा सरकारी खातों तक ही सीमित है। आम ग्राहकों के खातों और जमा रकम पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बैंक ने साफ किया है कि 18 फरवरी से ही कुछ संदिग्ध गतिविधियां नजर आने लगी थीं, जिसके बाद मामले को बोर्ड की स्पेशल कमेटी के सामने रखा गया। अब एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट कराने की तैयारी है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि यह हेराफेरी कितने समय से चल रही थी। इसमें कौन-कौन से बाहरी तत्व शामिल थे।
ब्रोकरेज फर्मों के अनुमानों के अनुसार, यह रकम बैंक की कुल नेट वर्थ का लगभग 0.9 फीसदी है। यह फाइनेंशियल ईयर 2026 के अनुमानित प्री-टैक्स प्रॉफिट का लगभग 20 फीसदी है। UBS ने संदिग्ध रकम को आईडीएफसी फर्स्ट के वित्त वर्ष 2026 के टैक्स के बाद प्रॉफिट का लगभग 22 फीसदी बताया है। हालांकि, इसने कहा कि बैंक की कैपिटल पर असर सीमित रहेगा। लगभग 1 फीसदी है। मॉर्गन स्टैनली ने अनुमान लगाया है कि इस फ्रॉड का असर वित्त वर्ष 2026 के प्री-टैक्स प्रॉफिट पर संभावित असर 20 प्रतिशत के करीब होगा। जेफरीज ने कहा है कि बैंक को निवेशकों को यह भरोसा दिलाना होगा कि यह समस्या किसी अन्य ग्राहक तक नहीं फैली है और मामला सिस्टेमिक नहीं दिखता।
बता दें कि मौजूदा समय में IDFC First Bank के शेयरों पर दबाव बना हुआ है। यह एक महीने की अवधि में 10 फीसदी नीचे आ गया है, जबकि 3 महीने के दौरान 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह जनवरी 2026 में हिट किए गए अपने 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर 87 रुपये के लेवल से 13% नीचे ट्रेड कर रहा है। वहीं, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों ने पिछले साल अप्रैल महीने में 52.50 रुपये के स्तर पर 52 सप्ताह का न्यूनतम स्तर छुआ था।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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