
IDFC First Bank Share Price: पिछले कुछ दिनों से देश के बैंकिंग वर्ल्ड से लेकर शेयर बाजार तक हलचल मची हुई है। प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख लेंडर IDFC First Bank के शेयरों में सोमवार को 16 फीसदी से ज्यादा की भारी गिरावट आई थी। वहीं, आज यानी मंगलवार को भी इसके शेयर लाल निशान में ही कामकाज कर रहे हैं। पिछले दो दिनों में निवेशकों को करोड़ों रुपये का झटका लग चुका है। निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। IDFC Bank के शेयरों में अचानक इतनी बड़ी बिकवाली 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड का खुलासा होने के बाद आई है। दरअसल, पिछले दिनों खुलासा हुआ कि बैंक के कर्मचारी मिलकर चंडीगढ़ ब्रांच के एक खाते से 590 करोड़ रुपये का गबन कर दिए हैं। इस खबर के आने के बाद निवेशकों और खाताधारकों के बीच हड़कंप मच गया।
दरअसल, हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक से अपना खाता बंद करने और फंड को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। जब बैंक ने खाता बंद करने की प्रक्रिया शुरू की, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। बैंक खाते में जमा रकम और बैंक के सिस्टम में दिखाई दे रही मौजूदा राशि में भारी अंतर था। शुरुआती जांच में पाया गया कि लगभग 490 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मिलान पहले ही हो चुका था, जबकि 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धोखाधड़ी का अनुमान लगाया गया है।
बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO वी. वैद्यनाथन ने कहा कि यह उनके ही कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की वजह से हुआ है। इन कर्मचारियों ने बाहरी तत्वों के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। फिलहाल चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है और मामला बोर्ड की स्पेशल कमेटी के पास है। वहीं, हरियाणा सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी जमा राशि स्वीकार करने से प्रतिबंधित कर दिया।
मंगलवार के कारोबार में IDFC First Bank का शेयर लगभग 2% की गिरावट के साथ 68.50 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। हाालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज फर्मों का नजरिया थोड़ा अलग और बैलेंस्ड है। एक्सिस डायरेक्ट और Emkay जैसे ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि यह घटना बैंक की स्ट्रक्चरल विफलता नहीं है, बल्कि एक ऑपरेशनल चूक है। हालांकि, एक्सिस डायरेक्ट ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए बैंक की कमाई के अनुमानों में 23% की कटौती की है, लेकिन अभी भी Buy रेटिंग बरकरार रखी है।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है बैंक का रिटेल बिजनेस मजबूत है और अगर फोरेंसिक ऑडिट में कुछ और बुरा निकलकर नहीं आता है, तो 87 रुपये का टार्गेट हासिल किया जा सकता है। वहीं, एमके ने Add रेटिंग देते हुए टार्गेट प्राइस को घटाकर 80 रुपये कर दिया है। उसके अनुसार, 590 करोड़ रुपये की यह रकम बैंक की कुल नेटवर्थ का महज 1.25% है। लॉन्ग टर्म में बैंक रिकवरी कर सकता है।
बता दें कि बैंक मैनेजमेंट ने रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंक की ओर दाखिल एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, फाइनल फाइनेंशियल इफैक्ट कई फैक्टर पर निर्भर करेगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण लियन मार्किंग की प्रकिया है। बैंक ने उन सभी बैंक अकाउंट्स की पहचान कर ली है, जिसमें धोखाधड़ी का पैसा ट्रांसफर किया गया था। इन खातों पर अन्य बैंकों की मदद से लियन लगा दिया गया है, जिससे उस रकम को निकाला न जा सके। इसके अलावा, बैंक इश्योरेंस क्लेम्स और लीगल रिकवरी प्रक्रियाओं के माध्यम से भी नुकसान की भरपाई की तैयारी कर रहा है। यह पैसा अभी भी बैंकिंग सिस्टम के भीतर मौजूद है। ऐसे में रिकवरी की संभावना बहुत ज्यादा है।
IDFC Bank ने इस पूरे मामले की विधवत जांच के लिए ग्लोबल ऑडिट दिग्गज KPMG को हायर किया है। फॉरेंसिक ऑडिट अगले 4 से 5 सप्ताह तक चलेगा। ऑडिट रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि बैंक के इंटरनल कंट्रोल्स कितने मजबूत हैं। यदि रिपोर्ट में किसी और बड़ी विसंगति का जिक्र नहीं आता है, तो निवेशकों का भरोसा तेजी से बहाल हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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