
India joins US-led Pax Silica Alliance: देश की राजधानी दिल्ली स्थित भारतमंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (India AI Impact Summit 2026) का आयोजन हो रहा है। इस समिट में दुनिया भर से लोग आ रहे हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शुक्रवार, 20 फरवरी को भारत ने एक ऐतिहासिक समझौता किया है। भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका (Pax Silica) गठबंधन में औपचारिक रूप से अपनी जगह बना ली है। यह केवल ए्क कूटनीतिक समझौता नहीं, बल्कि भविष्य में तकनीक पर नियंत्रण की तैयारी है। पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल होकर भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन का सबसे मजबूत विकल्प बनने की ओर आगे बढ़ रहा है।
पिछले साल दिसंबर 2025 में जब पैक्स सिलिका गठबंधन को बनाया गया था। तब इसका मकसद एक ऐसी व्यवस्था बनाना था, जहां AI और सेमीकंडक्टर जैसी महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी के लिए किसी एक देश पर निर्भर न रहना पड़े। लेकिन मौजूदा समय में इन सेमीकंडक्टर चीप को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले जरूरी रेयर अर्थ मेटल्स की प्रोसेसिंग पर चीन का 60% से ज्यादा कब्जा है।
इसी को देखते हुए अमेरिका की मूविंग गैप स्ट्रैटजी के तहत पैक्स सिलिका की नींव रखी गई थी, जिसके तहत चीन के चारों ओर एक सिलिकॉन कर्टेन खड़ा किया जा सके। इससे भविष्य में चीन को मॉडर्न AI मॉडल तैयार करने के लिए जरूरी हार्डवेयर मिलना मुश्किल हो जाएगा। वहीं, भारत जैसे सदस्य देशों को सब्सिडी और इन्वेस्टमेंट के माध्यम से तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने हस्ताक्षर समारोह में पैक्स सिलिका में भारत के औपचारिक प्रवेश की घोषणा की। उन्होंने इसे एक निर्णायक कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि यह 21वीं सदी की इकोनॉमिक और टेक्नोलॉजी सिस्टम को आकार देने में मदद करेगा।
पिछले दो महीनों में कूटनीतिक समीकरण तेजी से बदले। इसी महीने की शुरुआत में लंबे समय से अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सहमति बनी। इसके साथ ही केंद्रीय बजट 2026 में खनिजों को लेकर कई घोषणाएं भी की गई थीं, जिससे भारत की स्थिति बेहद मजबूत हुई है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जोर देते हुए कि भारत 28 वर्ष की औसत आयु के साथ दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। उन्होंने कहा, हम यहां केवल एक शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं कर रहे हैं, हम भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। हम युवा पीढ़ी के लिए नींव रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2047 में भी भारत की औसत आयु 37 वर्ष होगी, जो तकनीक और नवाचार के दम पर दशकों तक निरंतर विकास और अवसरों को सुनिश्चित करेगी।
भारत के इस कदम को लेकर एक्सपर्ट्स भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक बता रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे भारत को चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन टेक्नोलॉजी और जरूरी उपकरणों की सप्लाई चेन में बेहतर पहुंच मिलेगी। ये भारत के अपने सेमीकंडक्टर मिशन और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को और मजबूत करेगा। इससे हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, निर्यात में तेजी आएगी और चीन पर इंपोर्ट की निर्भरता कम होगी।
एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव ने कहा, ये कदम सेमीकंडक्टर, AI, इलेक्ट्रॉनिक्स और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए स्ट्रक्चरली बहुत पॉजिटिव है। खासतौर पर माइनिंग, मेटल और टेक सेक्टर के स्टॉक्स को फायदा होगा।
इसमें गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (GMDC) और नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (NALCO) जैसे माइनिंग और एल्युमिनियम सेक्टर की प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में डिक्सन टेक्नोलॉजीज को बड़ा फायदा दिख रहा है। ऑटो और इंजीनियरिंग सेक्टर में महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), बजाज ऑटो और भारत फोर्ज के शेयरों में तेजी की उम्मीद है। इसके साथ ही गोपालदास एक्सपोर्ट्स जैसी टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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