IPO Rules changed: IPO नियमों में बदलाव से जियो और NSE की लिस्टिंग हुई आसान? जानें क्या बदला और आप पर क्या होगा असर?

IPO Rules Changed: सरकार ने आईपीओ से जुड़े पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों में बदलाव किया है। नए ढांचे के तहत कंपनियों के लिए स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग का रास्ता आसान हो सकता है। माना जा रहा है कि इससे बड़े आईपीओ और निवेश के नए अवसर सामने आ सकते हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड14 Mar 2026, 10:17 PM IST
IPO नियमों में बड़ा बदलाव
IPO नियमों में बड़ा बदलाव

IPO Rules Changed: भारत का शेयर बाजार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है और कई बड़ी कंपनियां स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रही हैं। इसी बीच सरकार ने आईपीओ (IPO) से जुड़े एक अहम नियम में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने को एक अधिसूचना जारी करते हुए पब्लिक शेयरहोल्डिंग यानी जनता के लिए शेयर जारी करने से जुड़े नियमों में संशोधन किया है।

सरकार का मानना है कि इससे बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना आसान होगा और भारत के आईपीओ बाजार को भी नई रफ्तार मिल सकती है। खासकर ऐसे समय में जब पिछले साल की तेजी के बाद इस साल आईपीओ मार्केट में थोड़ी सुस्ती देखने को मिल रही है।

क्या हैं नए नियम?

वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने शुक्रवार, 13 मार्च 2026 को एक नोटिफिकेशन जारी किया। इस नए बदलाव के तहत 'सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) रूल्स, 1957' में संशोधन किया गया है। सबसे बड़ी हाइलाइट यह है कि अब लिस्टिंग के समय जनता के लिए न्यूनतम अनिवार्य हिस्सेदारी (मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग) को 5% से घटाकर 2.5% कर दिया गया है।

यानी अब बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना पहले से आसान हो गया है क्योंकि उन्हें शुरुआत में अपनी बहुत ज्यादा हिस्सेदारी बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी। सेबी (SEBI) ने पिछले साल ही इसे मंजूरी दी थी, जिसे अब सरकार ने लागू कर दिया है।

किस कंपनी को कितना शेयर देना होगा

सरकार द्वारा तय नए ढांचे के अनुसार अब आईपीओ में जनता के लिए शेयरों का हिस्सा कंपनी के आकार पर निर्भर करेगा।

  • अगर कंपनी की पोस्ट-इश्यू कैपिटल 1,600 करोड़ तक है, तो कम से कम 25% शेयर जनता के लिए जारी करने होंगे।
  • अगर कंपनी की कैपिटल 1,600 करोड़ से 4,000 करोड़ के बीच है, तो कम से कम 400 करोड़ के बराबर हिस्सेदारी जनता को देनी होगी।
  • अगर कंपनी की लिस्टिंग वैल्यूएशन 4,000 करोड़ से 50,000 करोड़ के बीच है, तो कम से कम 10% शेयर जनता को देने होंगे, लेकिन तीन साल के भीतर इसे बढ़ाकर 25% तक करना होगा।
  • अगर कंपनी की वैल्यूएशन 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ के बीच है, तो कम से कम 1,000 करोड़ के बराबर हिस्सेदारी और 8% शेयर जनता के लिए होंगे।
  • अगर कंपनी की वैल्यूएशन 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ के बीच है, तो कम से कम 2.75% शेयर जनता को ऑफर करने होंगे।
  • अगर कंपनी की वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ से ज्यादा है, तो कम से कम 1% शेयर जनता के लिए ऑफर करना होगा।

हालांकि ऐसी कंपनियों को तय समय सीमा के भीतर पब्लिक शेयरहोल्डिंग को बढ़ाकर 15% और बाद में 25% तक करना होगा।

बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी

विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने नियम कई बड़ी कंपनियों के लिए आईपीओ लाने में चुनौती पैदा करते थे। बड़ी वैल्यूएशन वाली कंपनियों के लिए एक साथ ज्यादा शेयर जनता को देना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में सरकार ने नियमों को थोड़ा लचीला बनाकर बड़ी कंपनियों को धीरे-धीरे पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने का मौका देने का फैसला किया है। इससे कंपनियां पहले छोटे हिस्से के साथ बाजार में लिस्ट हो सकेंगी और बाद में समय के साथ जनता की हिस्सेदारी बढ़ा सकेंगी।

किन कंपनियों को होगा फायदा

बाजार के जानकारों का मानना है कि यह नियम खास तौर पर रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platform) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसे बड़े आईपीओ को ध्यान में रखकर लाया गया है। रिलायंस की किसी बड़ी यूनिट की लिस्टिंग लगभग 20 साल बाद होने जा रही है और यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस अप्रैल तक अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर सकती है। नए नियमों की वजह से जियो को लिस्टिंग के समय अपनी बहुत बड़ी हिस्सेदारी नहीं गंवानी पड़ेगी।

आईपीओ बाजार को मिल सकती है नई रफ्तार

2025 में भारतीय आईपीओ बाजार ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था, लेकिन उसके बाद से बाजार में थोड़ी सुस्ती देखने को मिल रही है। ऐसे में सरकार का यह कदम बाजार में नई ऊर्जा ला सकता है। अगर बड़ी कंपनियां आईपीओ लेकर आती हैं तो निवेशकों को भी नए निवेश के मौके मिलेंगे और शेयर बाजार की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

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