
Bond Market: भारत के सेंट्रल बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से रेपो रेट में बड़ी कटौती की गई है। मौजूदा समय में रेपो रेट 5.25 फीसदी पर आ गया। वहीं यूएस फेड ने भी 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर दी है। इस रेट कट से बॉन्ड मार्केट में तेजी का दौर शुरू हो गया है। गुरुवार को भारतीय सरकारी बॉन्ड में तेजी आई। बेंचमार्क 10-साल की यील्ड 6.6122% पर सेटल हुई। बुधवार को यह 6.6649% पर बंद हुई, जो 1 अप्रैल से शुरू हुए इस फाइनेंशियल ईयर में अब तक 10-साल का सबसे ऊंचा क्लोजिंग लेवल है।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, RBI ने उम्मीद से ज़्यादा कटऑफ कीमतों पर 500 अरब रुपये (5.53 अरब डॉलर) के बॉन्ड खरीदे हैं। इससे सेकेंडरी मार्केट में बॉन्ड की कीमतों में तेज़ी आई। बताया जा रहा है कि RBI अभी और 500 अरब रुपये के बॉन्ड खरीदने की तैयारी कर रहा है। वैसे ब्याज दरें जब नीचे जाती हैं तो बॉन्ड मार्केट में तेजी की उम्मीद की जाती है। ऐसे में अभी पोर्टफोलियो को बॉन्ड के जरिए डाइवर्सिफाइड करने का अच्छा मौका है। वैसे सिर्फ रेट ही नहीं और भी कुछ वजह हैं, जिसके चलते आप बॉन्ड में निवेश पर विचार कर सकते हैं।
इस हफ़्ते अब तक भारत के बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी का एवरेज सरप्लस लगभग 1.67 ट्रिलियन रुपये रहा है, जबकि पिछले हफ़्ते यह 2.25 ट्रिलियन रुपये (24.96 अरब डॉलर ) था। इकोनॉमिक टाइम्स को दिए गए बयान में PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के फिक्स्ड इनकम हेड पुनीत पाल ने कहा कि दिसंबर के पहले दो हफ़्ते में लिक्विडिटी स्थिर रहने की उम्मीद है, हालांकि टैक्स आउटफ्लो के कारण इसमें धीरे-धीरे कमी आ सकती है।
मार्केट को उम्मीद है कि RBI FY26 के बाकी समय में 2 ट्रिलियन रुपये की OMO खरीदारी करेगा। RBI ने इस फाइनेंशियल ईयर में 3.16 ट्रिलियन रुपये के रिकॉर्ड बॉन्ड खरीदारी की है। इसके अलावा, फेड ने बुधवार को रेट्स में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। इससे U.S. ट्रेजरी यील्ड्स कम हो गईं और दुनिया भर में सेंटिमेंट को बढ़ावा मिला है।
जानकारों का कहना है कि इन्वेस्टमेंट मार्केट में बॉन्ड्स एक ऐसे विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जिन्हें अब तक रिटेल निवेशकों ने काफी हद तक नजरअंदाज किया है। पिछले कुछ साल में कॉर्पोरेट बॉन्ड (Corporate Bonds) मार्केट तेजी से बढ़ा है। बदलते आर्थिक माहौल, स्थिर आय (Income) की जरूरत और बेहतर रिटर्न के विकल्प तलाशते निवेशकों के लिए बॉन्ड अब एक जरूरी एसेट क्लास बनते जा रहे हैं। ये न सिर्फ पोर्टफोलियो में स्थिरता लाते हैं, बल्कि कई मामलों में बैंक एफडी और छोटी बचत योजनाओं से बेहतर रिटर्न भी देते हैं।
इक्विटी में मिलने वाले रिटर्न मार्केट के उतार-चढ़ाव के साथ बार-बार बदलते हैं, वहीं बॉन्ड नियमित ब्याज भुगतान (कूपन रेट) के ज़रिए निश्चित और अनुमानित आय प्रदान करते हैं। बॉन्ड की ब्याज दरें (फ्लोटिंग रेट बॉन्ड को छोड़कर) उनकी मैच्योरिटी तक स्थिर रहती हैं और ब्याज भुगतान पूर्व-निर्धारित अंतराल पर किए जाते हैं। इससे निवेशक यह अंदाजा लगा सकते हैं कि उन्हें किस तारीख पर कितनी आय मिलेगी और उसके मुताबिक बेहतर वित्तीय योजना बना सकते हैं।
आज के समय में इन्वेस्टमेंट-ग्रेड बॉन्ड्स बैंक FD की तुलना में बेहतर रिटर्न दे रहे हैं। बैंक एफडी में 6.25% से 7.50% तक ब्याज है, वहीं कई कॉर्पोरेट बॉन्ड डबल डिजिट तक यील्ड दे रहे हैं। यह रिटेल निवेशकों को महंगाई को मात देने में मदद करता है।
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