How to invest in Indian stocks in Dollar: भारतीय शेयर बाजार में कॉर्पोरेट अर्निंग सीजन शुरू हो चुका है। एक के बाद एक सभी कंपनियां अपने वित्तीय नतीजे जारी कर रही हैं। इसी कड़ी में बुधवार को देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस (Infosys) ने भी अपना तिमाही रिजल्ट जारी किया। इसके बाद अमेरिकी बाजार में इन्फोसिस ADR 10% बढ़ गया। इस खबर के बाद एक बार फिर से निवेशकों के बीच एक चर्चा छिड़ गई है कि क्या भारतीय कंपनियों के शेयर डॉलर मे खरीदना ज्यादा फायदेमंद है?
विदेशी बाजार में भारतीय स्टॉक्स खरीदना फायदेमंद?
जब हम Infosys, Wipro, Tata Motors जैसी भारतीय कंपनियों की बात करते हैं, तो अक्सर मन में सवाल आता है कि क्या इन्हें विदेशी बाजारों जैसे न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के जरिए खरीदना बेस्ड डील हो सकती है? आइए समझते हैं कि एक आम भारतीय निवेशक के लिए डॉलर में अपनी ही कंपनियों पर दांव लगाना कितना सही है और इसके पीछे के असली जोखिम क्या हैं।
इन 2 वजहों से निवेशक हो रहे आकर्षित
विदेशी बाजारों में निवेश का सबसे बड़ा आकर्षण करेंसी हेजिंग (Currency Hedging) है। आसान भाषा में कहें तो अगर आप डॉलर में निवेश करते हैं, तो आपको दो तरह से फायदा होने की संभावना रहती है। पहला, जिस कंपनी के शेयर आपने खरीदे हैं, उसकी कीमत बढ़े और दूसरा, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो जाए। ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि रुपया समय के साथ डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है।
ऐसे में अगर किसी ने अमेरिकी बाजार के माध्यम से भारतीय कंपनी के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसिप्ट (ADR) खरीदे हैं, तो शेयर प्राइस स्टेबल रहने पर भी उसे रुपये के मुकाबले डॉलर की बढ़ती कीमत का फायदा मिल जाता है। लेकिन इसमें भी कुछ जोखिम है। अगर भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होता है, तो आपका मुनाफा कम भी हो सकता है।
निवेश से पहले जरूर देख लें टैक्स से जुडे़ नियम
अक्सर लोगों को लगता है कि विदेशी बाजार में निवेश करना बहुत कठिन होगा, लेकिन आज के डिजिटल युग में यह बेहद आसान हो गया है। कई ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जो भारतीय निवेशकों को सीधे अमेरिकी बाजार में निवेश की सुविधा देते हैं। हालांकि, चार्ज के बारे में समझना बहुत जरूरी है। जब आप विदेश में पैसा भेजते हैं, तो आपको लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। इसके अलावा, फॉरेन इन्वेस्टमेंट पर लगने वाला टैक्स भी भारत के घरेलू निवेश से अलग होते है। डिविडेंड पर लगने वाला टैक्स और फॉरेक्स कंवर्जन फीस आपके प्रॉफिट को कम कर सकते हैं।
निवेश में जोखिम भी
बता दें कि भारतीय कंपनियां विदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स के जरिए कैपिटल जुटाने के मकसद से लिस्ट होती हैं। ऐसे में ग्लोबल पोर्टफोलियो बनाने वाले निवेशकों के लिए डॉलर के जरिए भारतीय कंपनी में निवेश करना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। लेकिन विदेशी बाजारों में भारतीय शेयरों (ADRs/GDRs) की लिक्विडिटी कम हो सकती है। इसके साथ ही समय के अंतर (Time Zone) के कारण भी आपको ट्रेडिंग में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।