
New Labour Codes Impact on IT Companies: भारतीय शेयर बाजार में अर्निंग्स सीजन शुरू हो चुका है। देश की दिग्गज आईटी कंपनियां वित्तीय वर्ष 2025-26 की तिसरी तिमाही का रिजल्ट जारी कर रही है, जिसमें इनके ऊपर वित्तीय दबाव देखने को मिल रहा है। देश की तीन सबसे बड़ी आईटी कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) इन्फोसिस (Infosys) और एचसीएल टेक (HCLTech) को बड़ा झटका लगा है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में लागू हुए नए लेबर कोड (Labor Code) के अनुपालन के कारण इन कंपनियों को अपनी जेब से कुल 4,373 करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी-भरकम रकम एक्सेप्शनल चार्ज के रूप में देनी पड़ी है। इसका सीधा असर इनके दिसंबर तिमाही के नतीजों पर पड़ा है और इनमें प्रॉफिट में डबल डिजिट की गिरावट दर्ज की गई है।
दरअसल, सरकार की तरफ से नवंबर 2025 में लागू किए गए नए लेबर कोड ने आईटी कंपनियों के सामने एक बड़ी वित्तीय चुनौती खड़ी कर दी है। 14 जनवरी को इन्फोसिस ने अपने परिणाम में 1,289 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च की जानकारी दी। इससे पहले TCS ने 2,128 करोड़ रुपये और एचसीएल टेक (HCL Tech) ने 956 करोड़ रुपये के भारी खर्च का खुलासा किया था।
नए लेबर कोड के तहत कंपनियों को अपने कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और छुट्टियों (Leave Liability) के बदले दी जाने वाली रकम के प्रावधानों में बड़ा बदलाव करना पड़ा है। टीसीएस के मामले में 2,128 करोड़ रुपये में से लगभग 1,800 करोड़ रुपये केवल ग्रेच्युटी फंड को सही करने में खर्च हुए हैं। यह अकाउंट उन कर्मचारियों के सोशल सिक्योरिटी फायदा सुनिश्चित करने के लिए है, जिन्होंने कंपनी को अपनी लंबी सेवाएं दी हैं।
इस वित्तीय दबाव की वजह से इन कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर पड़ा है। TCS 25.2 प्रतिशत का मार्जिन बरकरार रखने में कामयाब रही, लेकिन इन्फोसिस को तगड़ा झटका लगा है। इंफोसिस का मार्जिन पिछले तिमाही के 21 प्रतिशत से गिरकर 18.4 प्रतिशत पर आ गया है। हालांकि, कंपनी ने अपने एक बयान में कहा कि अगर लेबर कोड का अतिरिक्त बोझ नहीं होता, तो उसका मार्जिन 21.2 प्रतिशत रहता।
इसी बीच, HCL Tech ने अपने मार्जिन को सुधार कर 18.6 प्रतिशत तक पहुंचाने में कामयाब हो पाई है। हालांकि कंपनियां यह दावा कर रही हैं कि भविष्य में इसका प्रभाव केवल 10-20 बेसिस पॉइंट्स तक ही सीमित रहेगा, लेकिन मार्केट एनालिस्टों का कहना है कि इसका प्रभाव इससे ज्यादा रहेगा।
बता दें कि इस नए लेबर कोड का सबसे अहम नियम यह है कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी उनकी टोटल सीटीसी का कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए। अब तक आईटी कंपनियां भत्तों का हिस्सा ज्यादा रखती थीं, जिससे PF और ग्रेच्युटी पर कम खर्च करना पड़े। अब PF और ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन बेसिक पे पर होगी। इससे कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। जेफरीज जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते खर्चों के कारण कंपनियां भविष्य में वेतन बढ़ोतरी में कटौती कर सकती हैं।
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