IT स्टॉक्स में टॉप म्यूचुअल फंड्स की 10% से ज्यादा की हिस्सेदारी, रिटेल निवेशकों के लिए है बड़ा खतरा?

Indian IT Sector Crash: पिछले चार कारोबारी दिनों से आईटी सेक्टर में भारी गिरावट देखी जा रही है। इस दौरान यह लगभग 10% टूट चुका है। आईटी शेयरों में इस बड़ी हलचल ने देश के बड़े म्यूचुअल फंड्स की टेंशन बढ़ा दी है। 

Shivam Shukla
अपडेटेड16 Feb 2026, 01:28 PM IST
Indian IT Sector Crash
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Indian IT Sector Crash: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से हलचल मची हुई है। इसकी वजह आईटी सेक्टर है। सोमवार को Nifty IT इंडेक्स लगभग 1% गिर गया। इसमें पिछले चार दिनों से दबाव बना हुआ है। महज चार कारोबारी सत्रों में IT इंडेक्स 9.4% तक टूट चुका है। अगर इस महीने की बात करें, तो अब तक निवेशकों को 14.7% का बड़ा झटका लगा है।

सेंसेक्स-निफ्टी में IT सेक्टर की 10% से ज्यादा की हिस्सेदारी

भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में IT सेक्टर की 10% से ज्यादा की हिस्सेदारी है। ऐसे में इस पर जब दबाव रहता है, तो उसका असर पूरे बाजार पर देखने को मिलता है। मौजूदा गिरावट किसी फाइनेंशियल क्राइसिस या खराब बैलेंस शीट की वजह से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से देखी जा रही है। दरअसल, एंथ्रोपिक की तरफ से क्लाउड प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग ने निवेशकों को डरा दिया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह क्लाउट प्लेटफॉर्म कोडिंग और सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस में सक्षम है।

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देश के बड़े म्यूचुअल फंड्स का IT शेयरों पर बड़ा दांव

आईटी सेक्टर में इस भारी दबाव ने म्यूचुअल फंड निवेशकों की टेंशन बढ़ा दी है। दरअसल, देश के सबसे बड़े फंड्स ने IT शेयरों पर भारी दांव लगा रखा है। पराग पारिख फ्लेक्सीकैप फंड (PPFAS) ने अपने कुल फंड का लगभग 25% हिस्सा टेक्नोलॉजी शेयरों में निवेश किया है। इसका कुल एसेट वैल्यू 1,33,970 करोड़ है। इसमें TCS, Infosys और HCL Tech जैसी भारतीय कंपनियों के साथ-साथ अमेरिकी दिग्गज अमेजोन, अल्फाबेट, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट भी शामिल हैं। ग्लोबल लेवल पर टेक्नोलॉजी सेक्टर में मची इस उथल-पुथल ने इन बड़े फंड्स के रिटर्न पर दबाव बना दिया है।

कोटक मिडकैप फंड, ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड और कोटक फ्लेक्सीकैप फंड जैसे बड़े फंड्स ने भी अपने पोर्टफोलियो का 14% से 16% हिस्सा टेक स्टॉक्स को दे रखा है। निप्पॉन इंडिया स्मॉलकैप फंड को छोड़ दें, तो देश के लगभग सभी बड़े म्यूचुअल फंड्स IT सेक्टर में 10% से ज्यादा का एक्सपोजर रखते हैं। ऐसे में अगर IT सेक्टर में गिरावट जारी रहती है, तो निवेशकों के पोर्टफोलियो वैल्यू में भी बड़ी सेंध लग सकती है।

IT सेक्टर के रेवेन्यू में बड़े सेंध की उम्मीद

बता दें कि इंडियन IT कंपनियों की सबसे बड़ी ताकत उनका लेबर-इंटेंसिव मॉडल रहा है। इसका मतलब कम लागत पर अधिक वर्क-फोर्स इस्तेमाल करना है। लेकिन AI अब इस मॉडल को पूरी तरह से ध्वस्त कर रहा है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के एक नोट के मुताबिक, जेनरेटिव AI के बढ़ते इस्तेमाल से इस सेक्टर के कुल रेवेन्यू में 12% तक की गिरावट आ सकती है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि एप्लिकेशन डेवलपमेंट, मेंटेनेंस और टेस्टिंग जैसे कामों में 30% से 50% तक प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। इसका मतलब है कि वही काम अब बहुत कम लोग ही कर सकेंगे।

ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा कि अगले 3 से 4 सालों में इस टेक्नोलॉजी चेंजेस की वजह से सालाना रेवेन्यू में सीधे 2 फीसदी का असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब क्लाइंट्स ट्रेडिशनल आउटसोर्सिंग के बजाय AI- बेस्ड सॉल्यूशंस की डिमांड कर रहे हैं। Palantir जैसी कपंनियों के हालिया बयानों ने ERP एग्जीक्यूशन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इन्हें अब तक सुरक्षित माना जाता था।

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विदेशी निवेशक घटा रहे अपनी हिस्सेदारी

अब विदेशी निवेशक भी इस खतरे को भांप रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी एक साल पहले 12.7% थी, लेकिन अब घटकर 10.4% हो गई है। वहीं, इन्फोसिस में भी उनका स्टेक 32.9% कम होकर 30.3% पर आ गया है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अब सबसे बड़ा सवाल है कि ऐसे समय में रिटेल निवेशकों को क्या करना चाहिए? साल 2025 में भी IT शेयरों ने निराश किया था। इस दौरान लगभग 12.58% की गिरावट देखी गई थी। वहीं, साल 2026 की शुरुआत भी उम्मीदों के विपरीत हुई है। हालांकि, बाजार के जानकार इसे वैल्यूएशन रिसेट के तौर पर देख रहे हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग के एक्सपर्ट का मानना है कि शॉर्ट टर्म में IT सेक्टर से दूरी बनाना ही समझदारी है, लेकिन लॉन्ग टर्म के निवेश को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।

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