
LIC Investment: फरवरी महीने में लगभग हर कारोबारी दिन आईटी सेक्टर की कंपनियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। 18 फरवरी को भी Infosys और Tech Mahindra समेत कई आईटी शेयरों में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसबीच देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Life Insurance Corporation of India - LIC) ने आईटी सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाया है। कंपनी ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब निवेशक इन शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। एलआईसी ने बैंकिंग और बड़े इंडस्ट्रियल शेयरों में से अपनी हिस्सेदारी कुछ कम की है।
LIC के पास कुल 283 कंपनियों के शेयर हैं, जिनकी कीमत करीब 17.83 लाख करोड़ रुपये है। दिसंबर तिमाही में एलआईसी ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services - TCS) के लगभग 3,136 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसके अलावा, HCL Technologies में 2,293 करोड़ रुपये का निवेश बढ़ाया है और Coforge को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया है। इससे आईटी शेयरों में एलआईसी का निवेश 1.82 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.17 लाख करोड़ रुपये हो गया।
LIC के कुल निवेश में IT शेयरों की हिस्सेदारी 11.32 फीसदी से बढ़कर 12.43 फीसदी हो गई। हालांकि, दिसंबर 2025 के अपने पीक से आईटी स्टॉक्स 30 फीसदी तक गिर चुके हैं। ए एआई टूल्स की वजह से आईटी शेयरों में बिकवाली बढ़ी है। हाल में एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने ऐसा एआई टूल्स लॉन्च किए, जो ज्यादातर उन कामों को कर सकता है, जो आईटी कंपनियां करती हैं। इससे आईटी कंपनियों के बिजनेस पर असर पड़ने का डर है। आईटी शेयरों में बिकवाली की यह वजह है।
LIC भारतीय शेयर बाजार की वो ‘व्हेल’ है, जिसके पोर्टफोलियो में होने वाली जरा सी हलचल भी बाजार की दिशा तय कर सकती है। प्राइम डेटाबेस के आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर तिमाही में जब आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव था, तब LIC ने चुपचाप खरीदारी शुरू कर दी थी। कंपनी ने देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS में करीब 3,136 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है। इतना ही नहीं, HCL Tech में भी 2,293 करोड़ रुपये लगाए गए हैं। कोफोर्ज जैसे शेयरों में भी हिस्सेदारी बढ़ाई गई है।
जहां एक तरफ आईटी शेयरों में प्यार उमड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर से LIC ने थोड़ा किनारा किया है। पोर्टफोलियो को बैलेंस करने के लिए बीमा दिग्गज ने सरकारी बैंक SBI के करीब 3,080 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक में भी एलआईसी ने 1,528 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा से भी 1,173 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि LIC के पास अब फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों की हिस्सेदारी 27.21 फीसदी से घटकर 26.52 फीसदी रह गई है।
इतना ही नहीं LIC ने भारत की बड़ी और एनर्जी कंपनियों में भी हिस्सेदारी कम कर दी है। लार्सन एंड टूब्रो (L&T) में 2,442 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 2,367 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी कम कर दी है। मेटल सेक्टर में भी बड़ी बिकवाली हुई है। हिंडाल्को (Hindalco Industries) में 2,307 करोड़ रुपये और वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) में 1,491 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। साथ ही स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Steel Authority of India Limited - SAIL) में एलआईसी की हिस्सेदारी 10 फीसदी से घटकर 9.18 फीसदी हो गई।
सबसे बड़ा बदलाव Coforge में देखने को मिला है। सितंबर में जहां एलआईसी की हिस्सेदारी 1% से भी कम थी, वहीं दिसंबर तिमाही में यह बढ़कर 4.66% हो गई। यह उसके पूरे पोर्टफोलियो में सबसे तेज बढ़ोतरी में से एक है। मिडकैप आईटी कंपनी Coforge अपने 52 हफ्ते के हाई लेवल से 30 फीसदी से ज्यादा गिर चुकी है। एलआईसी ने कई अन्य कंपनियों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, जिनमें NMDC, Voltas, Dr. Reddy’s Laboratories, Astral Limited, Indian Overseas Bank, Exide Industries और JSW Energy शामिल हैं।
आईटी के अलावा LIC ने फार्मा शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। Sun Pharmaceutical Industries में 2,942 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके अलावा NMDC, Bajaj Auto, Coal India, Dr. Reddy’s Laboratories, Voltas और JSW Energy में भी हिस्सेदारी बढ़ाई है। वहीं Maruti Suzuki को टॉप बिकवाली सूची में रखा गया। कुल मिलाकर LIC ने 73 कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाई और 90 कंपनियों में घटाई है। बाजार में एआई के असर को लेकर बहस जारी है, लेकिन LIC का मानना है कि आईटी सेक्टर में गिरावट अस्थायी है और लंबी अवधि में यह निवेश फायदेमंद साबित हो सकता है।
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