MCap of top 10 companies: घरेलू शेयर बाजार में पिछले हफ्ते आई तेज गिरावट का असर सीधे देश की सबसे बड़ी कंपनियों पर दिखा। बीएसई की टॉप-10 कंपनियों में शामिल ज्यादातर दिग्गजों का बाजार पूंजीकरण (एमकैप) घट गया, जिससे निवेशकों की संपत्ति पर बड़ा असर पड़ा। हफ्ते भर चली बिकवाली ने यह साफ कर दिया कि जब बाजार दबाव में होता है, तो बड़े नाम भी सुरक्षित नहीं रहते।
सात कंपनियों का एमकैप 3.63 लाख करोड़ घटा
बीते सप्ताह बीएसई की शीर्ष 10 कंपनियों में से सात का कुल बाजार पूंजीकरण 3,63,412 करोड़ रुपये घट गया। वहीं, केवल तीन कंपनियां ऐसी रहीं, जिनके एमकैप में कुल मिलाकर 41,599 करोड़ रुपये की बढ़त दर्ज की गई।
रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे बड़ा नुकसान
बाजार पूंजीकरण के लिहाज से लंबे समय से नंबर-1 बनी हुई रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे ज्यादा झटका लगा। एक ही हफ्ते में कंपनी का एमकैप 1,58,533 करोड़ रुपये घट गया और यह 19,96,446 करोड़ रुपये पर आ गया। इस दौरान रिलायंस का शेयर करीब 7.36 फीसदी टूट गया।
एचडीएफसी बैंक अब भी दूसरे पायदान पर
निजी क्षेत्र के दिग्गज HDFC Bank के लिए भी सप्ताह अच्छा नहीं रहा। बैंक का बाजार पूंजीकरण 96,154 करोड़ रुपये घटकर 14,44,150 करोड़ रुपये रह गया। नुकसान के बावजूद एचडीएफसी बैंक ने दूसरे स्थान पर अपनी पकड़ बनाए रखी।
टॉप-3 में बदलाव, TCS की एंट्री
पिछले सप्ताह भारती एयरटेल को 45,275 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसके चलते वह तीसरे स्थान से खिसककर चौथे नंबर पर आ गई। अब TCS ने शीर्ष तीन में जगह बना ली है, हालांकि टीसीएस को भी 15,232 करोड़ रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ा।
बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और इंफोसिस भी दबाव में
अन्य दिग्गज कंपनियों की बात करें तो बजाज फाइनेंस का एमकैप 18,730 करोड़ रुपये घटा, जबकि लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को करीब 18,729 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी Infosys के बाजार पूंजीकरण में भी 10,761 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
कुछ कंपनियों को हुआ फायदा
गिरते बाजार के बीच कुछ कंपनियों ने निवेशकों को राहत भी दी। ICICI Bank का बाजार पूंजीकरण 34,902 करोड़ रुपये बढ़ा, जबकि हिंदुस्तान यूनीलिवर के एमकैप में 6,097 करोड़ रुपये की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि भारतीय स्टेट बैंक के एमकैप में 600 करोड़ रुपये की हल्की गिरावट देखी गई।
पिछले हफ्ते के आंकड़े साफ बताते हैं कि बाजार में उतार-चढ़ाव का असर बड़े शेयरों पर भी तेजी से पड़ता है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी के फैसले न लें और बाजार की दिशा को समझकर ही कदम उठाएं।